बस्तर में बदलाव की बयार: 108 माओवादियों का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण, CM साय बोले— "बंदूक हार रही, विश्वास जीत रहा"
बस्तर में बड़ी सफलता: जगदलपुर में ₹3.29 करोड़ के इनामी 108 सशस्त्र माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण। इसमें 44 महिला कैडर भी शामिल हैं। जानें कैसे छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति और विकास कार्यों से नक्सलवाद की कमर टूट रही है और क्षेत्र में शांति की नई शुरुआत हो रही है।Puja Sahu
जगदलपुर/रायपुर : 11 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में माओवाद के खिलाफ जारी अभियान को आज एक ऐसी बड़ी सफलता मिली है, जिसे राज्य के इतिहास में शांति की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
जगदलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ₹3.29 करोड़ के कुल इनामी 108 सशस्त्र माओवादियों ने हिंसा का रास्ता त्याग कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
विशेष बात यह है कि आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों में 44 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जो बस्तर के बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य की ओर इशारा करता है।
"सुरक्षा, विकास और विश्वास" का त्रिकोण
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि बस्तर में अब भय का वातावरण समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा: "आज बस्तर में बंदूक हार रही है और लोगों का शासन पर विश्वास जीत रहा है। यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि बस्तर की जनता अब हिंसा नहीं, बल्कि शांति, सुशासन और विकास चाहती है।" मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय राज्य सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग को दिया है।
प्रमुख बिंदु: एक नज़र में
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बड़ी संख्या: कुल 108 सशस्त्र माओवादियों ने एक साथ हथियार डाले।
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महिला भागीदारी: आत्मसमर्पण करने वालों में 44 महिला कैडर शामिल।
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इनामी राशि: आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल ₹3.29 करोड़ का इनाम घोषित था।
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संकल्प: मुख्यमंत्री ने 'भयमुक्त और विकसित छत्तीसगढ़' के निर्माण के संकल्प को दोहराया।
केंद्र और राज्य का साझा प्रहार
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय के कारण ही नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई संभव हो पा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार "सुरक्षा, विकास और विश्वास" के तीन मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है, जिसका परिणाम आज धरातल पर दिख रहा है।
इस सामूहिक आत्मसमर्पण से न केवल माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है, बल्कि उन युवाओं को भी एक कड़ा संदेश गया है जो भटक कर हिंसा की राह पर निकल पड़े थे। शासन की पुनर्वास नीति के तहत अब इन पूर्व माओवादियों को शिक्षा, स्वरोजगार और बेहतर जीवन के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
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