अमित बघेल अंतरिम जमानत : अमित बघेल को हाईकोर्ट से राहत, 3 महीने की सशर्त अंतरिम जमानत मंजूर
रायपुर/बिलासपुर: विवादित बयान मामले में छत्तीसगढ़ीया क्रांति सेना के अध्यक्ष अमित बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।Bhupesh Tandiya
रायपुर/बिलासपुर: विवादित बयान मामले में छत्तीसगढ़ीया क्रांति सेना के अध्यक्ष अमित बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान की है।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अमित बघेल को 3 महीने की अंतरिम जमानत दी गई है। हालांकि, इस दौरान उनके रायपुर जिला में प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
गौरतलब है कि विवादित बयान को लेकर अमित बघेल के खिलाफ कुल 14 एफआईआर दर्ज की गई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राहत तो दी है, लेकिन शर्तों के साथ।
अब इस फैसले के बाद मामले की आगामी सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।
दरअसल, 5 महीने पहले रायपुर वीआईपी चौक पर छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा टूटने पर अमित बघेल ने अग्रवाल और सिंधी समाज को लेकर टिप्पणी की थी। जिसके बाद रायपुर में अलग-अलग थानों में मामले दर्ज किए गए थे।
हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए शर्त रखी है कि, अमित बघेल अगले 3 महीने तक रायपुर जिले की सीमा में निवास नहीं करेंगे। हालांकि, उन्हें कोर्ट में पेशी के लिए तय तारीखों पर रायपुर आने की अनुमति दी गई है।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। अमित बघेल की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा। वहीं, आपत्तिकर्ता की ओर से सुनील ओटवानी और राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने पैरवी की।
रायपुर के VIP चौक पर 5 महीने पहले छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति से तोड़फोड़ की गई थी। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना मौके पर पहुंची और जमकर हंगामा किया। इस दौरान क्रांति सेना और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प भी देखने को मिली।
हंगामे के बाद छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति दोबारा स्थापित कर दी गई। पुलिस ने मूर्ति तोड़ने वाले आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी मानसिक रूप से बीमार है और उसने नशे में मूर्ति तोड़ी थी। परिजनों के मुताबिक आरोपी मानसिक रूप से बीमार है। सेंद्री और रांची में इलाज हुआ था।
अमित बघेल के बयान के विरोध में रायपुर, रायगढ़ और सरगुजा समेत प्रदेश भर प्रदर्शन हुआ था। अग्रवाल समाज ने कड़ी कार्रवाई और सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की थी। समाज का कहना है था कि छत्तीसगढ़ की एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए ऐसे बयान देने वालों पर सख्त कदम उठाना जरूरी है।
इस लेख को शेयर करें
टिप्पणियां (0)
टिप्पणी करने के लिए लॉग इन करें
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है
पहले टिप्पणी करने वाले बनें!
