ऑस्ट्रेलिया में 'प्रलय' जैसा मंजर: शार्क बे में खून जैसा लाल हुआ आसमान, दहशत में लोग
ऑस्ट्रेलिया के शार्क बे में चक्रवात 'नरेल' के आने से पहले आसमान 'खूनी लाल' रंग में बदल गया। जानिए आखिर क्यों हुआ यह डरावना बदलाव और क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण।Puja Sahu
पर्थ, ऑस्ट्रेलिया: पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तटीय इलाकों, विशेष रूप से शार्क बे और डनहम**** में पिछले कुछ घंटों से कुदरत का बेहद डरावना और दुर्लभ नजारा देखने को मिल रहा है। यहाँ का आसमान अचानक गहरा 'खूनी लाल' हो गया है, जिसे देखकर स्थानीय निवासी और सोशल मीडिया यूजर्स दंग हैं।
चक्रवात 'नरेल' (Cyclone Narelle) का असर
यह खौफनाक दृश्य शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात नरेल**** के आने से ठीक पहले देखा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, जब यह भीषण तूफान तटीय इलाकों की ओर बढ़ा, तो इसकी तेज हवाओं ने ऑस्ट्रेलिया के भीतरी रेगिस्तानी इलाकों से भारी मात्रा में लाल धूल और मिट्टी उड़ाई।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है, जो इसे लाल रंग देती है। जब यह धूल आसमान में छा गई, तो सूरज की रोशनी के बिखरने के कारण पूरा वातावरण गहरे लाल रंग में तब्दील हो गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए 'बिना फिल्टर' के वीडियो
इंटरनेट पर इस घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। शार्क बे के स्थानीय निवासियों ने वीडियो साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह कोई डिजिटल फिल्टर नहीं बल्कि असलियत है।
- दृश्य: वीडियो में चारों तरफ लाल धूल की मोटी परत और नारंगी-लाल रंग का धुंधला आसमान दिखाई दे रहा है।
- अनुभव: लोगों का कहना है कि हवा में धूल इतनी ज्यादा है कि सांस लेना और आंखों को खुला रखना मुश्किल हो रहा है। कुछ लोगों ने इसे "दुनिया के अंत" जैसा नजारा बताया है।
विशेषज्ञों की राय
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह एक भौतिक प्रक्रिया है जिसे 'रेले**** स्कैटरिंग' से जोड़कर देखा जा सकता है, जहाँ धूल के कण नीली रोशनी को रोक देते हैं और केवल लंबी तरंग दैर्ध्य वाली लाल रोशनी ही हम तक पहुँच पाती है। भीषण चक्रवात के दबाव और धूल भरी आंधी के मिलन ने इस प्रभाव को कई गुना बढ़ा दिया है।
सावधानी बरतने की सलाह
प्रशासन ने चक्रवात नरेल के मद्देनजर रेड अलर्ट जारी किया है। तेज हवाओं और खराब दृश्यता के कारण लोगों को घरों के भीतर रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है।
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह एक भौतिक प्रक्रिया है जिसे 'रेले स्कैटरिंग' से जोड़कर देखा जा सकता है, जहाँ धूल के कण नीली रोशनी को रोक देते हैं और केवल लंबी तरंग दैर्ध्य वाली लाल रोशनी ही हम तक पहुँच पाती है। भीषण चक्रवात के दबाव और धूल भरी आंधी के मिलन ने इस प्रभाव को कई गुना बढ़ा दिया है।
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