बस्तर में खाद्य सुरक्षा भगवान भरोसे! बिना लैब टेस्टिंग रसायनों से पके फल और सब्जियाँ खा रहे लोग, अधिकारी बोले—'आँखों से देखकर लगाते हैं अंदाज़ा'
बस्तर संभाग में बिना किसी वैज्ञानिक और केमिकल लैब टेस्टिंग के बिक रहे हैं फल-सब्जियाँ। केवल आँखों से देखकर और अंदाज़े से हो रही है खाद्य सुरक्षा की जाँच, लोगों की सेहत दांव पर।Puja Sahu
जगदलपुर : बस्तर संभाग में लोगों की थाली तक पहुँच रहे फल और सब्जियों की सुरक्षा को लेकर अब एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। त्यौहारों और आम दिनों में धड़ल्ले से बिक रहे फलों को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन भले ही सड़े-गले फलों पर कार्रवाई करने और उन्हें नष्ट करने का दावा कर रहा हो, लेकिन सबसे बड़ी लापरवाही केमिकल जांच को लेकर सामने आई है।
विभागीय अधिकारियों ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि फिलहाल बस्तर में फलों और सब्जियों की स्थानीय स्तर पर लैब टेस्टिंग की कोई सुविधा मौजूद नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि बस्तर की आम जनता जिन फलों और सब्जियों को सेहतमंद समझकर खरीद रही है, वे उन्हें बीमार भी बना सकती हैं। उन फलों में 'कैल्शियम कार्बाइड', 'ऑक्सीटोसिन', 'एथिलीन' या अन्य प्रतिबंधित और जानलेवा रसायनों का इस्तेमाल हुआ है या नहीं, इसकी तत्काल वैज्ञानिक पुष्टि करने का बस्तर में कोई जरिया नहीं है।
आँखों की जाँच है से तय हो रही सेहत!
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब विभागीय अधिकारियों से केमिकल से पकाए गए फलों की पहचान के बारे में पूछा गया, तो उनका कहना था कि निरीक्षण के दौरान केवल "देखकर" अंदाज़ा लगाया जाता है कि फलों को किस प्रकार के रसायनों से पकाया गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ आँखों से देखकर या अंदाज़ा लगाकर यह तय किया जा सकता है कि फल जहरीले केमिकल से पकाए गए हैं या नहीं? क्या बिना किसी वैज्ञानिक आधार के अधिकारियों का यह अंदाज़ा लोगों की सेहत की सुरक्षा के लिए काफी है?
रायपुर लैब पर निर्भरता, जाँच में देरी
अधिकारियों के मुताबिक, विभाग रूटीन चेकिंग के दौरान कुछ संदिग्ध फलों और सब्जियों के सैंपल जरूर लेता है। इन सैंपलों को जाँच के लिए रायपुर स्थित स्टेट फूड टेस्टिंग लैब भेजा जाता है। वहाँ से जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है। लेकिन बस्तर संभाग में खुद की कोई अत्याधुनिक फूड टेस्टिंग लैब न होने की वजह से पूरी व्यवस्था बाहरी लैब पर निर्भर है। जब तक रायपुर से रिपोर्ट आती है, तब तक संबंधित लॉट के फल और सब्जियाँ बाजार में बिक चुके होते हैं और लोग उन्हें खा चुके होते हैं।
नियम क्या कहते हैं?
ऐसे मामलों की सटीक और वैज्ञानिक जाँच केवल 'स्टेट फूड टेस्टिंग लैब', 'NABL' मान्यता प्राप्त लैब' या 'FSSAI अप्रूव्ड लैब' में ही हो सकती है। जहाँ केमिकल एनालिसिस के जरिए प्रतिबंधित और हानिकारक पदार्थों की उपस्थिति की शत-प्रतिशत पुष्टि की जाती है।
केवल 62 किलो सड़े फल नष्ट, रसायनों पर चुप्पी
हालिया कार्रवाई के नाम पर विभाग ने बस्तर में केवल 62 किलो सड़े-गले फलों को जब्त कर नष्ट करने की बात कही है। लेकिन केमिकल से पकाए गए जहरीले फलों पर स्थानीय स्तर पर कोई भी लैब रिपोर्ट या बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
कुल मिलाकर, बस्तर में खाद्य सुरक्षा का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी पूरी तरह से संदेह, अंदाज़े और केवल 'दिखने' के आधार पर चल रहा है। डिजिटल और आधुनिक होते इस दौर में भी बस्तर के नागरिकों की सेहत को पुख्ता वैज्ञानिक जाँच और अत्याधुनिक लैब के इंतजार में राम भरोसे छोड़ दिया गया है।
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