बजट 2026 पर भड़का विपक्ष: राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने बताया 'जनविरोधी', जानें किसने क्या कहा
विपक्ष ने बजट 2026 को "कुर्सी बचाओ बजट" करार देते हुए आरोप लगाया है कि यह केवल सत्ता में बने रहने के लिए चुनिंदा राज्यों को खुश करने का प्रयास है। राहुल गांधी ने इसे "असली संकटों से अनजान" बताया, जिसमें बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं की अनदेखी की गई है।Puja Sahu
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार पेश किए गए केंद्रीय बजट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जहाँ सरकार इसे 'विकसित भारत' की नींव बता रही है, वहीं राहुल गांधी समेत विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने इसे दिशाहीन, जनविरोधी और केवल कुछ सहयोगियों को खुश करने वाला बजट करार दिया है।
राहुल गांधी का तीखा प्रहार: "असली संकटों से अनजान है सरकार" लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बजट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर देश की बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए पांच मुख्य बिंदु उठाए:
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बेरोजगारी: नौकरियों के बिना युवा भटक रहे हैं।
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मैन्युफैक्चरिंग: विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट जारी है।
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निवेश: निवेशक देश से अपनी पूंजी निकाल रहे हैं।
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बचत: घरेलू बचत में रिकॉर्ड कमी आई है।
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किसान: अन्नदाता आज भी परेशान है।
राहुल गांधी ने कहा, "यह बजट भारत के असली संकटों से पूरी तरह अनजान है और किसी भी बड़े सुधार से इनकार करता है।"
क्षेत्रीय नेताओं की नाराजगी: पंजाब और बिहार को 'नजरअंदाज' करने का आरोप
भगवंत मान (मुख्यमंत्री, पंजाब) : उन्होंने बजट को पंजाब की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला बताया। मान ने कहा कि न तो किसानों के लिए MSP पर कोई ठोस बात हुई, न ही युवाओं के लिए रोजगार का रोडमैप दिखा। उन्होंने इसे पंजाब के साथ 'सौतेला व्यवहार' करार दिया।
ममता बनर्जी (मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल): ममता बनर्जी ने बजट को SC/ST, OBC और महिला विरोधी बताते हुए दावा किया कि अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। उन्होंने आर्थिक कॉरिडोर की घोषणाओं को भी 'झूठा' करार दिया।
अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी के प्रमुख ): अखिलेश यादव ने बजट की आलोचना करते हुए इसे "निराशाजनक" और "भाजपाई भ्रष्टाचार का अदृश्य लेखा-जोखा" करार दिया है। उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि बजट में आम जनता का न तो जिक्र है और न ही फिक्र, बल्कि यह केवल 5% संपन्न लोगों को फायदा पहुँचाने और सत्ता बचाने की कोशिश मात्र है। यादव ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जो राज्य प्रधानमंत्री देता है, उसे बदले में कुछ नहीं मिला। उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की आय जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर आर्थिक हालात ऐसे ही रहे, तो जनता को लोहे पर पीतल की परत चढ़ाकर गहने पहनने को मजबूर होना पड़ेगा।
मीसा भारती (सांसद, RJD): बिहार की राजनीति में भी इस बजट को लेकर गुस्सा है। मीसा भारती ने तंज कसते हुए कहा कि पूरे बजट भाषण में उन्हें 'बिहार' शब्द तक सुनने को नहीं मिला, जबकि चुनाव के बाद राज्य को बड़ी उम्मीदें थीं।
भले ही सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सेक्टर में निवेश के जरिए विकास का दावा कर रही हो, लेकिन विपक्ष ने इसे "कॉर्पोरेट समर्थक और जनविरोधी" बताकर घेराबंदी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इन मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
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