CAPF के लिए 'वन नेशन, वन रूल' की तैयारी: गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में पेश करेंगे ऐतिहासिक विधेयक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में CAPF Bill 2026 पेश करेंगे। जानें कैसे यह विधेयक 10 लाख जवानों वाले CRPF, BSF और ITBP जैसे बलों के नियमों में एकरूपता लाएगा और IPS प्रतिनियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।Puja Sahu
नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026' पेश करने जा रहे हैं। 10 लाख से अधिक जवानों वाले अर्धसैनिक बलों (CAPF) के लिए यह बिल मील का पत्थर माना जा रहा है। इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB जैसे विभिन्न बलों के प्रशासनिक नियमों में एकरूपता लाना और उनके नेतृत्व ढांचे को व्यवस्थित करना है।
प्रशासन में बड़े बदलाव की तैयारी
वर्तमान में, देश के अलग-अलग अर्धसैनिक बल अपने-अपने विशिष्ट कानूनों और सेवा नियमों के तहत संचालित होते हैं। इस बिल के कानून बनने के बाद:
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एकीकृत नियम: सभी बलों के लिए भर्ती, पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति के नियम एक समान हो जाएंगे।
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नेतृत्व में स्थिरता: 10 लाख से ज्यादा कर्मियों वाले इन बलों की कमान संरचना में स्थायित्व लाने का प्रयास किया जाएगा।
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समन्वय: सरकार का तर्क है कि इससे केंद्र और राज्यों के बीच आंतरिक सुरक्षा को लेकर बेहतर तालमेल बैठेगा।
IPS प्रतिनियुक्ति और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ
यह बिल मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले की पृष्ठभूमि में लाया गया है। कोर्ट ने तब भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने का सुझाव दिया था। हालांकि, नए बिल के प्रावधानों के अनुसार:
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IG पद: 50% पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित रहेंगे।
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ADG पद: 67% पदों पर IPS अधिकारियों की तैनाती का कोटा तय किया गया है।
सरकार का मानना है कि शीर्ष पदों पर IPS अधिकारियों की उपस्थिति से वैधानिक मान्यता और पेशेवर अनुभव का लाभ मिलता है, जबकि साथ ही कैडर अधिकारियों के लिए भी पदोन्नति के नए रास्ते खोले जा रहे हैं।
बिल को लेकर बढ़ता विवाद और विरोध
जहाँ सरकार इसे 'प्रशासनिक सुधार' बता रही है, वहीं अर्धसैनिक बलों के पूर्व अधिकारियों के बीच इसे लेकर असंतोष भी है।
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संसदीय समिति की मांग: रिटायर्ड अधिकारियों के संगठनों ने मांग की है कि इस बिल की बारीकियों की जांच के लिए इसे संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए।
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अवमानना याचिका: हाल ही में सेवानिवृत्त CAPF अधिकारियों के एक समूह ने गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि सरकार कोर्ट के पुराने निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं कर रही है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, आंतरिक और सीमा सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक प्रणाली अनिवार्य है। अब देखना यह होगा कि सदन में इस बिल पर विपक्ष और कैडर अधिकारियों की चिंताओं को सरकार किस तरह संबोधित करती है।
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