विधानसभा में गूंजा नकटी का मुद्दा : बारिश में गरीबों के आशियाने तोड़ने पर बिफरी कांग्रेस, स्थगन प्रस्ताव पर तीखी बहस
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में नकटी तोड़फोड़ मामले पर भारी हंगामा। कांग्रेस ने 85 गरीब परिवारों को बेघर करने और मानसून में अमानवीय कार्रवाई का आरोप लगाते हुए लाया स्थगन प्रस्ताव। जानिए सदन में क्या हुई बहस।Puja Sahu
रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नकटी में हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस संवेदनशील मुद्दे पर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने नकटी में की गई इस कार्रवाई को लेकर स्थगन सूचना दी। कांग्रेस ने शासन की इस कार्रवाई को पूरी तरह असंवैधानिक और अमानवीय करार दिया।
गरीबों को बेघर करने और अमानवीय कार्रवाई का आरोप
स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग करते हुए विपक्षी सदस्यों ने सरकार को घेरा। कांग्रेस के प्रमुख आरोप निम्नलिखित थे:
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85 परिवारों को किया बेघर: विपक्ष ने आरोप लगाया कि नकटी में बिना किसी ठोस विकल्प के 85 गरीब परिवारों के घरों को मलबे में तब्दील कर दिया गया।
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मानसून के दौरान कार्रवाई: कांग्रेस विधायकों ने इस कार्रवाई के समय पर कड़ा ऐतराज जताया। पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने सवाल उठाया, "आखिर बारिश के इस मौसम में ही इस कार्रवाई को अंजाम देने की क्या जरूरत थी?" वहीं कवासी लखमा ने कहा कि यह कार्रवाई बेहद अमानवीय है, इसे चार महीने बाद भी टाला जा सकता था।
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पीएम आवास को भी तोड़ा: विपक्ष ने दावा किया कि इस कार्रवाई के दौरान उन आशियानों को भी ढहा दिया गया जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे।
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मूक पशुओं की मौत: कार्रवाई के दौरान लापरवाही का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस अफरा-तफरी में चार गाय और एक बछिया की मलबे में दबकर मौत हो गई।
सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के वक्तव्य पर सत्तापक्ष के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद सदन का माहौल गर्मा गया और दोनों पक्षों के बीच नकटी की कार्रवाई को लेकर तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
विपक्ष के सभी सदस्यों ने एकजुट होकर सदन की अन्य सभी कार्यवाहियों को रोककर केवल नकटी मामले पर ही विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। इस हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही में काफी व्यवधान आया।
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