PCC मिशन 2028: आदिवासी कांग्रेस की बैठक में 7 एजेंडे तय, अरविंद नेताम और नंदकुमार साय के सहारे भाजपा को घेरने की रणनीति
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने 'मिशन 2028' का शंखनाद कर दिया है। जल, जंगल, जमीन और आदिवासी पहचान के मुद्दे पर 12 सूत्रीय प्रस्ताव पास कर पार्टी बड़े जन आंदोलन की तैयारी में है। पूरी खबर पढ़ें।Puja Sahu
रायपुर : छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। कांग्रेस पार्टी 'मिशन 2028' के तहत प्रदेश के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को बचाने के पारंपरिक मुद्दों के साथ एक बार फिर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इस बार आदिवासियों को एकजुट करने के लिए पार्टी धर्मांतरण, डी-लिस्टिंग और जनगणना में अलग कॉलम जैसे बड़े भावनात्मक मुद्दों को भी हवा दे रही है।
इन तमाम रणनीतियों को लेकर आज राजधानी रायपुर के राजीव भवन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में करीब 4 घंटे तक एक मैराथन बैठक चली। इस बैठक में आदिवासी समाज की चिंताओं और उनके राजनैतिक अधिकारों को लेकर एक 12 सूत्रीय सामाजिक और राजनैतिक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया है।
जन आंदोलन के लिए बनेगी 'प्रदेश स्तरीय आदिवासी कमेटी'
कांग्रेस आदिवासियों के हकों की आवाज उठाने के लिए एक विशेष “प्रदेश स्तरीय आदिवासी कमेटी” का गठन करने जा रही है। यह कमेटी प्रदेश के कोने-कोने और गांव-गांव जाकर आदिवासियों से सीधा संवाद करेगी और सरकार के खिलाफ एक बड़े जन आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी।
कांग्रेस का 12 सूत्रीय सामाजिक और राजनैतिक प्रस्ताव
बैठक में पारित प्रस्ताव में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए निम्नलिखित 12 प्रमुख मांगें और बिंदु शामिल किए गए हैं:
- खनन परियोजनाओं को रद्द करने की मांग: हसदेव समेत नई खदानों में कोयला और आयरन ओर (लोहा) का खनन तुरंत रोका जाए और 1,742 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्जन की अनुमति वापस ली जाए।
- 32% आरक्षण लागू हो: राजभवन में अटके पड़े आदिवासी आरक्षण विधेयक की अधिसूचना अविलंब जारी की जाए।
- वनाधिकार पट्टों का वितरण: वन अधिकार अधिनियम (FRA) का कड़ाई से पालन करते हुए आदिवासियों को पट्टे बांटे जाएं।
- विस्थापितों की वापसी और मुआवजा: नक्सल हिंसा और फर्जी एनकाउंटर से प्रभावित पीड़ितों को न्याय और उचित मुआवजा मिले।
- निर्दोष आदिवासियों की रिहाई: जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को रिहा किया जाए और 25 हजार से अधिक स्थायी-अस्थायी वारंट रद्द हों।
- ग्राम सभा को सर्वोच्चता: पेसा (PESA) कानून और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों की हर हाल में रक्षा की जाए।
- UCC से आदिवासियों को छूट: समान नागरिक संहिता (UCC) से आदिवासियों की शादी, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था को बाहर रखा जाए।
- बंद स्कूलों को दोबारा खोलना: बस्तर और सरगुजा संभाग में बंद किए गए स्कूलों को खोला जाए और स्थानीय भर्तियों में आदिवासियों को प्राथमिकता मिले।
- पेसा कानून का पूर्ण पालन: बिना ग्राम सभा की स्पष्ट सहमति के आदिवासियों की जमीन का अधिग्रहण पूरी तरह बंद हो।
- पांचवीं अनुसूची का क्रियान्वयन: आदिवासियों की जनसांख्यिकी और संस्कृति को बाहरी दखल से सुरक्षित रखा जाए।
- "वनवासी" शब्द का कड़ा विरोध: आरएसएस और भाजपा द्वारा आदिवासियों को 'वनवासी' कहने की कथित साजिश की निंदा की गई।
- जनगणना में अलग कॉलम: आगामी जनगणना में आदिवासियों की स्पष्ट और स्वतंत्र पहचान के लिए एक अलग से कॉलम (धर्म कोड) की व्यवस्था की जाए।
आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बाद भी आदिवासियों के साथ छल: दीपक बैज
बैठक के बाद पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
"प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासियों के हित सुरक्षित नहीं हैं, बल्कि उनके हक छीने जा रहे हैं। शपथ ग्रहण के पहले दिन से ही यह सरकार आदिवासियों को ठगने और लूटने का काम कर रही है। केंद्र सरकार ने हसदेव के जंगलों को उजाड़ने की अनुमति दे दी है, जिससे वहां के 6 लाख पेड़ काटे जाने की कगार पर हैं।"
बैज ने आगे कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी संगठन आदिवासियों को आपस में लड़ाकर उनकी एकता तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके खिलाफ कांग्रेस बहुत जल्द एक निर्णायक लड़ाई शुरू करेगी।
नेताम और साय को साधने की तैयारी: कांग्रेस का बड़ा सियासी दांव
बस्तर और सरगुजा संभाग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कांग्रेस एक बड़ा राजनैतिक दांव खेलने की तैयारी में है। पार्टी भाजपा से नाराज चल रहे कद्दावर आदिवासी नेताओं—अरविंद नेताम और नंदकुमार साय का समर्थन हासिल करने की कोशिश में है। अरविंद नेताम पहले ही सरगुजा क्षेत्र में अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं, वहीं नंदकुमार साय भी समय-समय पर आदिवासी हितों को लेकर भाजपा को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, दीपक बैज स्वयं इन दोनों नेताओं के संपर्क में हैं।
बैठक में वरिष्ठ नेताओं की रही मौजूदगी
राजीव भवन में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव और पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इसके अलावा, उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल, पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, अनिला भेड़िया, विधायक विद्यावती सिदार, लालजी सिंह राठिया, फूल सिंह राठिया, अंबिका मरकाम, इंद्र शाह मंडावी और सावित्री मंडावी सहित 40 से अधिक प्रमुख आदिवासी नेता इस मैराथन बैठक का हिस्सा बने।
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