बदली छत्तीसगढ़ की आबकारी नीति: जानें अब किन-किन मौकों पर खुली रहेंगी शराब की दुकानें
छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग द्वारा हाल ही में किए गए नीतिगत बदलावों के कारण इस वर्ष 30 जनवरी (महात्मा गांधी की पुण्यतिथि) के अवसर पर राज्य में पहली बार शराब दुकानें खुली रहीं।Puja Sahu
रायपुर: राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार की नई आबकारी नीति के तहत, साल भर में होने वाले 'ड्राई डे' (शुष्क दिवस) की कुल संख्या में कमी करने का फैसला किया गया है।
प्रमुख बदलाव और उद्देश्य
राज्य कैबिनेट की हालिया बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार, अब केवल राष्ट्रीय पर्वों और अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर ही शराब की दुकानें बंद रहेंगी। पूर्व की तुलना में कई क्षेत्रीय और स्थानीय अवकाशों को ड्राई डे की सूची से हटा दिया गया है।
आबकारी विभाग के अनुसार, नई आबकारी निति के तहत अब प्रदेश में सालभर में घोषित ड्राई डे की संख्या 8 से घटकर 4 रह गई है। जिन चार दिनों को ड्राई डे से मुक्त किया गया है, उनमें 30 जनवरी (महात्मा गांधी की पुण्यतिथि), मोहर्रम, होली और दिवाली शामिल हैं। इन चारों अवसरों पर अब शराब की दुकानें खुली रहेंगी।
इस कदम के पीछे सरकार के मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
- राजस्व में वृद्धि: ड्राई डे कम होने से राज्य के आबकारी विभाग के राजस्व में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।
- पर्यटन को बढ़ावा: पड़ोसी राज्यों से आने वाले पर्यटकों की सुविधा और होटल व्यवसाय की मांग को देखते हुए यह लचीलापन अपनाया गया है।
- अवैध बिक्री पर रोक: अक्सर देखा गया है कि ड्राई डे के दौरान अवैध शराब की बिक्री और कालाबाजारी बढ़ जाती है। दुकानों के खुले रहने से इस पर लगाम लगेगी।
अब इन विशेष दिनों पर ही रहेगा 'ड्राई डे'
सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, मुख्य रूप से इन दिनों पर पूर्ण पाबंदी जारी रहेगी:
26 जनवरी (गणतंत्र दिवस)
15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस)
2 अक्टूबर (गांधी जयंती)
18 दिसंबर (बाबा गुरु घासीदास जयंती)
निर्वाचन के दौरान (मतदान के 48 घंटे पूर्व और मतगणना का दिन)
बता दें कि इससे पहले छत्तीसगढ़ में 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर (महात्मा गांधी जयंती), मोहर्रम, 18 दिसंबर (बाबा गुरु घासीदास जयंती), 30 जनवरी, होली और दिवाली को ड्राई डे घोषित किया गया था। नई आबकारी निति के बाद अब केवल चार दिन ही ड्राई डे के रूप में प्रभावी रहेंगे।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम स्पष्ट रूप से राजस्व संग्रहण और व्यावहारिक शासन की दिशा में एक कदम है। अब यह देखना होगा कि शासन इस नई नीति के साथ कानून-व्यवस्था को कैसे संतुलित बनाए रखता है।
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