धान खरीदी को लेकर गरमाई सियासत; नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल को लिखा पत्र, टोकन में कटौती का लगाया आरोप
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने प्रदेश में धान खरीदी के दौरान आ रही समस्याओं को लेकर राज्यपाल रमेन डेका को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।Puja Sahu
रायपुर : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अंतिम दौर में व्यवस्थाओं को लेकर राजनीति तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने प्रदेश के किसानों की समस्याओं को लेकर राज्यपाल रमेन डेका को एक औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने किसानों के बीच व्याप्त 'अफरा-तफरी' के माहौल और धान खरीदी में हो रही कथित अनियमितताओं कि ओर राज्यपाल का ध्यान आकर्षित किया है।
किसानों में आक्रोश, 'शक्ति' में प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, शक्ति जिले के किसान धान खरीदी केंद्रों की अव्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। किसानों का आरोप है कि उन्हें धान बेचने के लिए टोकन प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी किसानों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जल्द से जल्द समाधान की मांग की है।
टोकन में 40% की कटौती का दावा
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा है कि किसानों को जारी किए जाने वाले टोकन में 40 प्रतिशत तक की कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि टोकन कटने के बावजूद किसानों का पूरा धान नहीं खरीदा जा रहा है। कटौती के कारण किसानों को अपनी उपज कम दाम पर बिचौलियों को बेचने का डर सता रहा है। प्रदेश भर में किसानों के बीच अनिश्चितता और अफरा-तफरी का माहौल है।
मुख्यमंत्री को पत्र के बाद अब राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
डॉ. महंत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इससे पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भी इस विषय में पत्र लिखकर अवगत कराया था, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
अब उन्होंने राज्यपाल से संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए आग्रह किया है की:
1. राज्यपाल सरकार को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी करें। 2. प्रदेश के प्रत्येक पंजीकृत किसान का एक-एक दाना धान खरीदा जाना सुनिश्चित किया जाए। 3. टोकन कटौती की व्यवस्था को तुरंत रोककर किसानों को राहत दी जाए।
नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि साल भर मेहनत करने वाले अन्नदाता को अपनी ही फसल बेचने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जो कि चिंताजनक है।
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