छत्तीसगढ़ विधानसभा: अविश्वास प्रस्ताव पर बरसे भूपेश बघेल, 136 बिंदुओं के आरोप पत्र के साथ साय सरकार को घेरा
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष ने साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर 136 बिंदुओं पर घेरा। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सरकार को हर मोर्चे पर फेल बताते हुए खाद किल्लत, कानून व्यवस्था और 'अदृश्य शक्ति' के दखल पर तीखे आरोप लगाए। पढ़ें सदन की पूरी बहस।Puja Sahu
रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष द्वारा भाजपा सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन में तीखी बहस देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सरकार पर चौतरफा हमला बोलते हुए 136 बिंदुओं का आरोप पत्र प्रस्तुत किया और दावा किया कि साय सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है।
इस गरमागरम बहस के मुख्य अंशों को समेटती हुई एक विस्तृत रिपोर्ट:
छत्तीसगढ़ विधानसभा: अविश्वास प्रस्ताव पर बरसे भूपेश बघेल, सरकार को बताया 'विफल'
1. 'अदृश्य शक्ति' और 'मुसोलिनी' के नाम पर तीखी बहस
भाषण की शुरुआत में भूपेश बघेल ने भाजपा पर वैचारिक हमला बोला। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर की एक पुरानी टिप्पणी का जवाब देते हुए बघेल ने कहा:
"सोनिया गांधी जी इटली से आईं और भारत की होकर रह गईं, हमें इस पर गर्व है। लेकिन जो लोग शुचिता की बात करते हैं, उन्हें जानना चाहिए कि गोलमेज सम्मेलन के बाद मुंजे (BS Moonje) इटली होकर भारत आए थे।
उन्होंने वहां मुसोलिनी से राष्ट्रवाद सीखा और वही ड्रम लेकर आए जो आज आरएसएस बजाता है। आपकी प्रेरणा मुसोलिनी ही हैं।"
बघेल ने आरोप लगाया कि राज्य में एक 'अदृश्य शक्ति' काम कर रही है,
जिसने सरकार बनने से पहले ही छत्तीसगढ़ को चलाना शुरू कर दिया था। इस पर पलटवार करते हुए भाजपा विधायक सुनील सोनी ने मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाया। बघेल ने जवाब दिया कि मनमोहन सिंह जब बोलते थे तो पूरी दुनिया सुनती थी, जबकि मौजूदा प्रधानमंत्री का अमेरिका कई बार अपमान कर चुका है।
2. किसानों के मुद्दों और खाद किल्लत पर घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने साय सरकार को किसान विरोधी बताते हुए धान खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था को पूरी तरह फेल करार दिया:
- धान की बर्बादी: जब से साय सरकार आई है, संग्रहण केंद्रों में धान भीगकर सड़ रहा है। डबल इंजन सरकार का एकमात्र फायदा यह मिला कि धान जमा करने की मियाद अप्रैल तक बढ़ानी पड़ी, फिर भी काम पूरा नहीं हुआ।
- खाद का कृत्रिम संकट : सरकार पहले बाजार में खाद की कृत्रिम कमी पैदा करती है, फिर महंगे दामों पर खरीदती है। किसान आज डीएपी और यूरिया के लिए भटक रहे हैं और उन्हें प्रति बोरी 700 रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है।
- फसल विविधीकरण पर धोखा: कृषि मंत्री प्रोत्साहन राशि की बात करते हैं, लेकिन हमारी सरकार ने किसानों को ₹15,000 प्रति एकड़ दिया था। वर्तमान सरकार लोगों की आय खत्म करने का षड्यंत्र रच रही है।
मंत्री का जवाब: कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कहीं कोई समस्या नहीं है, विपक्ष सिर्फ लोगों को भ्रमित कर रहा है।
3. कानून व्यवस्था और कानून के राज पर सवाल
बघेल ने राज्य की कानून व्यवस्था को ध्वस्त बताते हुए कहा कि खुद सत्तापक्ष के लोगों को अपनी सरकार पर भरोसा नहीं है:
- सीतापुर की घटना: सीतापुर में भाजपा विधायक द्वारा तहसीलदार की पिटाई की गई।
- अवैध उत्खनन व हत्याएं: रेत का अवैध खनन चरम पर है। आपसी रंजिश में गाड़ी में आग लगाकर तीन लोगों की हत्या कर दी गई, जिसमें दोनों पक्ष सत्तापक्ष से जुड़े थे। पीड़ित परिवार सीबीआई (CBI) जांच की मांग कर रहा है।
- बलौदाबाजार हिंसा: बलौदाबाजार की घटना पर भी सरकार ने सीबीआई जांच नहीं कराई, जिससे लगता है कि किसी बड़े षड्यंत्र को छिपाने की कोशिश हो रही है।
4. आर्थिक बदहाली और राशन कार्डधारकों की प्रताड़ना
आर्थिक मोर्चे पर घेरते हुए बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब तेंदूपत्ता खरीदने के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ा।
- सप्लीमेंट्री बजट न लाना: सरकार अनुपूरक बजट इसलिए नहीं लाई क्योंकि उसके पास पैसा नहीं है या केंद्र से मैचिंग ग्रांट नहीं मिल रही है। इसके कारण विधवा पेंशन रुकी हुई है और निकायों-पंचायतों में वेतन नहीं बंट पा रहा है।
- केवाईसी (KYC) का संकट: अनिवार्य इंटरनेट और केवाईसी की शर्तों के कारण 30 लाख गरीबों को राशन नहीं मिल पाया है।
वित्त मंत्री का जवाब: वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने आर्थिक संकट के दावों को खारिज करते हुए कहा:
"हमारी सरकार बेहतर वित्तीय प्रबंधन के साथ बजट लाती है। केंद्र से पूरा पैसा आ रहा है और राज्य का मैचिंग ग्रांट भी दिया जा रहा है। हमने बार-बार सप्लीमेंट्री बजट न लाने का नियम बनाया है, जब जरूरत होगी विधायिका से अनुमति ले ली जाएगी।"
5. पर्यावरण, बस्तर और स्वास्थ्य विभाग पर हमला
- जंगलों की कटाई: बघेल ने आरोप लगाया कि पेसा (PESA) कानून को कांग्रेस ने लागू किया था, लेकिन वर्तमान में पुलिस के पहरे में तमनार और हसदेव के जंगलों को काटा जा रहा है। विरोध करने वाले विधायकों और आदिवासियों को वहां जाने से रोका जा रहा है।
- बस्तर में खनन: बस्तर के दुर्गम इलाकों में जहां पैदल जाना मुश्किल है, वहां खनन कर लिया गया। बघेल ने अंदेशा जताया कि लोहा कहीं और का है और बस्तर का बताकर हेराफेरी हो रही है।
- स्वास्थ्य व्यवस्था: राज्य के सबसे बड़े अस्पताल 'मेकाहारा' की स्थिति खराब है और स्वास्थ्य विभाग ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से दवाइयां खरीद रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने एक घंटे लंबे भाषण का समापन करते हुए कहा कि यह 136 बिंदुओं का आरोप पत्र इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह सरकार जनता विरोधी निर्णय ले रही है और इसे एक मिनट भी सत्ता की कुर्सी पर रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
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