छत्तीसगढ़ विधानसभा: हंगामे के बीच भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक पारित, विपक्ष ने वित्तीय हानि की जताई आशंका
छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक पारित। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने बिना वित्तीय पत्रक के विधेयक लाने पर जताई आपत्ति, वहीं राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने वित्तीय हानि की आशंका को किया खारिज।Puja Sahu
रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज 'छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक' को सदन की मंजूरी मिल गई। हालांकि, इस विधेयक के पारित होने के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायकों ने विधेयक की प्रक्रिया और इसके संभावित वित्तीय परिणामों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
विपक्ष की मुख्य आपत्ति: वित्तीय पत्रक का अभाव
चर्चा के दौरान पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने विधेयक का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार ने इस संशोधन के साथ वित्तीय पत्रक प्रस्तुत नहीं किया है। पटेल ने कहा, "बिना वित्तीय पत्रक के विधेयक को पारित करना संसदीय परंपराओं के विपरीत है। इस संशोधन से राज्य को भविष्य में बड़ी वित्तीय हानि होने की संभावना है।"
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बिना जानकारी दिए विधेयक पारित करने की यह परंपरा बन गई, तो भविष्य में किसी भी विभाग में होने वाले नुकसान की जानकारी विधायकों को नहीं मिल पाएगी। पटेल के अनुसार, "अगर सदस्यों के पास पर्याप्त डेटा और जानकारी नहीं होगी, तो वे सदन में सार्थक चर्चा कैसे करेंगे? यह एक गलत और खतरनाक परंपरा की शुरुआत है।"
सरकार का पक्ष: वित्तीय हानि का दावा खारिज
विपक्ष के इन आरोपों पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने सरकार का बचाव किया। उन्होंने विपक्ष की आपत्तियों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस संशोधन विधेयक के लिए वित्तीय पत्रक की कोई आवश्यकता नहीं है। मंत्री वर्मा ने सदन को आश्वस्त किया कि इस संशोधन से सरकारी खजाने को कोई वित्तीय हानि नहीं होगी, बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए लाया गया है।
बहुमत से पारित हुआ विधेयक
विपक्ष के भारी विरोध और 'वॉकआउट' जैसी स्थिति के बावजूद, सत्ता पक्ष ने अपने बहुमत के बल पर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक को पारित करा लिया। सरकार का मानना है कि इस कदम से राजस्व संबंधी मामलों में स्पष्टता आएगी, जबकि विपक्ष इसे राज्य के राजस्व हितों के साथ खिलवाड़ बता रहा है।
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