झीरम घाटी नक्सली नरसंहार: NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की पुष्टि का इंतजार
जगदलपुर स्थित विशेष NIA अदालत ने 2013 के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। परिवर्तन यात्रा के दौरान हुए इस भीषण हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व समेत 29 लोगों की जान चली गई थी। कानून के अनुसार, इस मामले में सजा सुनाए जाने के बाद मृत्युदंड या गंभीर सजा पर अंतिम अमल छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही होता है।Puja Sahu
जगदलपुर: वर्ष 2013 के बहुचर्चित और वीभत्स झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में जगदलपुर स्थित विशेष NIA अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी 10 जीवित आरोपियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। कानून के मुताबिक, सजा पर अमल से पहले छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से इसकी पुष्टि होना अनिवार्य है।
इस मामले में कुल 11 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
मृत्युदंड पाने वाले 10 दोषी:
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प्रमिला मोडियम
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चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
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सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
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मुक्का मांडवी
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कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
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आयता मरकाम
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मदकामी देवा
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जोगा मदकामी
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बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा
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महादेव नाग
क्या था झीरम घाटी का पूरा मामला?
यह घटना 25 मई 2013 की है, जब छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव नजदीक थे। राज्य में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार थी और 10 वर्षों से विपक्ष में बैठी कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापसी के लिए पूरे प्रदेश में 'परिवर्तन यात्रा' निकाल रही थी।
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काफिले पर हमला: सुकमा में रैली खत्म करने के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर की ओर लौट रहा था। करीब 25 गाड़ियों के इस काफिले में लगभग 200 नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
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अचानक घेराबंदी: दोपहर करीब 3:40 बजे जैसे ही काफिला झीरम घाटी के घने जंगलों में पहुँचा, नक्सलियों ने पहले से पेड़ गिराकर रास्ता ब्लॉक कर दिया। गाड़ियां रुकते ही घात लगाए 200 से अधिक नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
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शीर्ष नेतृत्व का सफाया: हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक लगातार फायरिंग होती रही।
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महेंद्र कर्मा की बर्बर हत्या: शाम 5:30 बजे नक्सली पहाड़ियों से नीचे उतरे और एक-एक गाड़ी की तलाशी लेने लगे। 'सलवा जुडूम' आंदोलन के जनक महेंद्र कर्मा को पहचानकर नक्सलियों ने उन्हें घेर लिया और अत्यंत बर्बरता से करीब 100 गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी।
इस सोचे-समझे और लक्षित हमले में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत कांग्रेस की पूरी शीर्ष बस्तर लीडरशिप शहीद हो गई थी। खुफिया तंत्र की विफलता के बीच हुए इस भीषण नरसंहार के 11 साल बाद अदालत का यह फैसला पीड़ितों के परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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