छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मिली अंतरिम जमानत
कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत: 72 करोड़ के कमीशन का आरोप, 13 महीने बाद जेल से रिहाई, पर छत्तीसगढ़ में नो-एंट्री।Puja Sahu
नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ के चर्चित 2000 करोड़ रुपये के शराब घोटाला मामले में प्रदेश के पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा को उच्चतम न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को करीब ढाई घंटे चली लंबी सुनवाई के बाद जस्टिस की बेंच ने लखमा को अंतरिम जमानत मंजूर कर ली।
लखमा 15 जनवरी 2025 से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। उनकी इस जमानत को कांग्रेस खेमे में एक बड़ी नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
कड़ी शर्तों के साथ मिली राहत
एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने कोर्ट में लखमा का पक्ष रखा। अदालत ने जमानत देते हुए कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं:
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राज्य निकाला: जमानत अवधि के दौरान लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा। वे केवल अदालती पेशी के समय ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।
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दस्तावेज जमा: उन्हें अपना पासपोर्ट कोर्ट में जमा करना होगा।
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हाजिरी: उन्हें अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने ED को लगाई फटकार सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का रुख जांच एजेंसी (ED) के प्रति कड़ा रहा। कोर्ट ने करीब 3 महीने पहले भी ED से तीखे सवाल पूछे थे। कोर्ट ने पूछा: "ऐसी कौन सी जांच है जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई? आप एक तरफ जमानत का विरोध करते हैं और दूसरी तरफ कहते हैं कि जांच जारी है। आखिर जांच पूरी करने के लिए और कितना समय चाहिए?" अदालत ने जांच अधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें स्पष्ट करना होगा कि लखमा के खिलाफ वर्तमान में क्या जांच लंबित है।
ED के गंभीर आरोप: "बेटे का घर और कांग्रेस भवन निर्माण"
प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में लखमा के खिलाफ बेहद गंभीर दावे किए हैं:
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महीने का फिक्स कमीशन: ED के वकील सौरभ पांडेय के अनुसार, लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे और उन्हें हर महीने 2 करोड़ रुपये मिलते थे। 36 महीनों में उन्हें कुल 72 करोड़ रुपये मिलने का दावा किया गया है।
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पैसे का उपयोग: ED का आरोप है कि इस अवैध राशि का उपयोग लखमा के बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और सुकमा में कांग्रेस भवन बनवाने में किया गया।
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नीतिगत बदलाव: लखमा पर आरोप है कि उनके इशारे पर ही FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई और शराब नीति में बदलाव किए गए ताकि सिंडिकेट को फायदा हो सके।
भूपेश बघेल ने किया फैसले का स्वागत
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस निर्णय पर खुशी जताते हुए कहा कि सत्य की लड़ाई कठिन जरूर होती है, लेकिन जीत हमेशा सत्य की ही होती है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए जवाब है जो राजनीतिक द्वेष के चलते कार्रवाई कर रहे थे।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?
ED के अनुसार, तत्कालीन भूपेश सरकार के दौरान IAS अनिल टुटेजा, AP त्रिपाठी और अनवर ढेबर के सिंडिकेट ने सरकारी खजाने को 2,100 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया। आरोप है कि यह घोटाला नकली होलोग्राम, बेहिसाब शराब की बिक्री और कमीशनखोरी के जरिए अंजाम दिया गया था।
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