राजिम में भू-माफिया बेखौफ: नियम-कायदे ताक पर, अवैध प्लाटिंग के लिए पाट रहे तालाब और सिंचाई नहर; प्रशासन मौन
राजिम में भू-माफिया बेखौफ! बिना डायवर्सन के धड़ल्ले से काटी जा रही अवैध प्लॉटिंग। कबीर नगर पार्ट-2 के लिए सिंचाई नहर और डेढ़ एकड़ के केतकी तालाब को पाटने का सनसनीखेज मामला आया सामने, प्रशासन मौन।Puja Sahu
राजिम : छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में प्रसिद्ध धार्मिक नगरी राजिम में भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। नियम-कायदों को ताक पर रखकर यहाँ न केवल कृषि भूमि का बिना डायवर्सन (परिवर्तन) कराए कॉलोनी बसाई जा रही है, बल्कि मुरुम की सड़कें बनाकर धड़ल्ले से प्लॉट काटे जा रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध कारोबार के लिए भू-माफिया अब सार्वजनिक तालाबों और सिंचाई विभाग की नहरों को भी पाटने से गुरेज नहीं कर रहे हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले में मूकदर्शक बना हुआ है। प्रशासन की नाक के नीचे पट गया डेढ़ एकड़ का निस्तारी तालाब तालाब पाटने का एक गंभीर मामला राजिम के बरोंडा क्षेत्र में सामने आया है।
स्थानीय निवासी नेतराम धृतलहरे ने 2 जुलाई को कलेक्टर भगवान सिंह उइके से लिखित शिकायत कर भू-माफियाओं के खिलाफ साक्ष्य के रूप में वीडियो भी सौंपे हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, जून के आखिरी सप्ताह में खसरा नंबर 584 में दर्ज करीब डेढ़ एकड़ के प्राचीन केतकी तालाब को जेसीबी मशीनों से बेखौफ होकर पाट दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि युवक ने तालाब पटने के दौरान स्थानीय तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक गुहार लगाई, लेकिन किसी ने काम नहीं रुकवाया। जिन लोगों ने तालाब से सटी कृषि भूमि खरीदी है, उन्होंने ही अपनी अवैध प्लाटिंग का रास्ता चमकाने के लिए इस निस्तारी तालाब को दफन कर दिया। प्रशासन की इस ढुलमुल नीति से शह पाकर भू-माफियाओं ने अब चौबे बांधा मार्ग पर स्थित दानी तालाब को भी सड़क की तरफ से पाटना शुरू कर दिया है।
2016 के रिकॉर्ड में था डेढ़ एकड़, रसूखदारों ने बदलवाया स्वरूप
वर्ष 2016 में तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष रहे पवन सोनकर ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में केतकी तालाब लगभग डेढ़ एकड़ में दर्ज था। साल 2016 में इसे बकायदा 10 साल की लीज पर एक धीवर (मछुआरे) को मछली पालन के लिए दिया गया था।
सोनकर का आरोप है कि राजनीतिक रसूख के दम पर भू-माफियाओं ने सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर तालाब का रकबा छोटा करवा दिया। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद डेढ़ एकड़ के इस तालाब को पाटकर अब आधे से भी कम कर दिया गया है। सालभर पहले हुई एक संदेहास्पद जांच में तालाब के कुछ हिस्से को निजी जमीन बता दिया गया, जो सीधे तौर पर अधिकारियों की मिलीभगत को दर्शाता है।
कबीर नगर पार्ट-2 के लिए सिंचाई नहर पर ही बना दिया रास्ता
राजिम-गरियाबंद मार्ग पर जमीनों की बढ़ती मांग का फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने शहर से 5 किलोमीटर के दायरे में 20 से अधिक जगहों पर अवैध प्लाटिंग कर दी है। हाईवे के किनारे कृषि भूमि पर मुरुम बिछाकर पहले 'कबीर नगर' नाम की अवैध कॉलोनी बसाई गई और सालभर में एक एकड़ से ज्यादा जमीन बेच दी गई।
अब माफिया 'कबीर नगर पार्ट-2' की तैयारी में हैं। पीछे के हिस्से में प्लाटिंग करने के लिए रास्ते की कमी पड़ी, तो भू-माफियाओं ने सिंचाई विभाग की सरकारी नहर के ऊपर एक ह्यूम पाइप डालकर अवैध रास्ता तैयार कर लिया। क्षेत्र में चर्चा है कि सत्तासीन संगठन से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण अधिकारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। राजिम में हर महीने औसतन 200 अवैध प्लॉटों की रजिस्ट्री होना, सिस्टम और भू-माफिया के इस गठजोड़ की गवाही दे रहा है।
क्या कहता है कानून?
भारतीय संविधान और सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक तालाब, जल निकाय या निस्तारी भूमि के मूल स्वरूप को किसी भी स्थिति में बदला नहीं जा सकता। ऐसा करना कानूनन अपराध है।
100 से ज्यादा रकबे प्रतिबंधित, तालाब मामले की कराएंगे जांच: एसडीएम इस पूरे मामले में जब राजिम एसडीएम विशाल महाराणा से बात की गई, तो उन्होंने कहा:
"राजिम क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है और अब तक 100 से अधिक रकबों की खरीदी-बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। तालाब और सिंचाई नहर को पाटे जाने का मामला अभी हमारे संज्ञान में आया है। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
अब देखना यह होगा कि प्रशासन कागजी दावों से आगे बढ़कर इन बेखौफ भू-माफियाओं पर कब और क्या कार्रवाई करता है, या फिर राजिम के ऐतिहासिक जल स्रोत इसी तरह माफियाओं की भेंट चढ़ते रहेंगे।
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