स्कूली छात्रों की फेयरवेल पार्टियों पर कड़ा रुख, बाल संरक्षण आयोग ने जारी किए सख्त निर्देश
छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग ने स्कूलों में फेयरवेल पार्टी के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब बिना स्कूल प्रबंधन की अनुमति और शिक्षकों की निगरानी के छात्र कोई भी आयोजन नहीं कर सकेंगे।Puja Sahu
रायपुर : छत्तीसगढ़ में स्कूली छात्रों द्वारा स्कूल के बाहर या बिना प्रबंधन की जानकारी के आयोजित की जाने वाली फेयरवेल पार्टियों और अन्य फंक्शनों पर अब राज्य बाल संरक्षण आयोग ने सख्त रुख अपना लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह के किसी भी आयोजन के लिए स्कूल प्रबंधन की पूर्व अनुमति और शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
कलेक्टर और DEO को निर्देश जारी
छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग ने लोक शिक्षण संचालनालय, प्रदेश के सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को पत्र लिखकर कड़े निर्देश जारी करने की अनुशंसा की है। आयोग का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल की आवश्यकता है।
आयोग के दिशा-निर्देशों के मुख्य बिंदु:
आयोग द्वारा की गई अनुशंसाओं में निम्नलिखित बातों पर विशेष जोर दिया गया है:
- पूर्व सूचना अनिवार्य: यदि छात्र स्वयं किसी फेयरवेल पार्टी या समारोह का आयोजन कर रहे हैं, तो इसकी सूचना स्कूल प्रबंधन को देना अनिवार्य होगा।
- शिक्षकों की निगरानी: कोई भी आयोजन बिना शिक्षकों की उपस्थिति के नहीं होगा। समारोह को गरिमामय तरीके से संपन्न कराना शाला प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी।
- सुरक्षा सर्वोपरि: स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि आयोजनों के दौरान किसी भी प्रकार के जोखिम भरे स्टंट, रील मेकिंग या असुरक्षित गतिविधियां न हों।
- स्पष्ट प्रोटोकॉल: आयोग ने प्रशासन से कहा है कि इन आयोजनों के लिए एक नियमावली (प्रोटोकॉल) तैयार की जाए, जिसका पालन करना हर स्कूल के लिए अनिवार्य हो।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ फेयरवेल के नाम पर छात्र हुड़दंग, सड़कों पर खतरनाक स्टंट या असुरक्षित स्थानों पर पार्टियों का आयोजन करते हैं। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने यह कदम उठाया है ताकि किसी भी अनहोनी को रोका जा सके।
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