छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था और कुप्रबंधन को लेकर दीपक बैज का सरकार पर तीखा हमला
छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल। होली पर हुई हिंसा, धान खरीदी में कुप्रबंधन और वित्तीय विफलता को लेकर साय सरकार को घेरा।Puja Sahu
रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था और भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए हैं। बैज ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है और सरकार बुनियादी मोर्चों पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
होली पर 'आतंक' का माहौल: गृह मंत्री पर साधा निशाना
दीपक बैज ने कहा कि इस साल होली के दौरान पूरे प्रदेश में भय और आतंक का माहौल रहा। उन्होंने कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा:
- महिलाओं के साथ अभद्रता: त्योहार के दौरान महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की कई घटनाएं सामने आईं।
- पुलिस पर हमले: बैज ने दावा किया कि उपद्रवियों के हौसले इतने बुलंद थे कि पुलिसकर्मियों की वर्दी तक फाड़ दी गई।
- नशे का प्रभाव: इन हिंसक घटनाओं के पीछे शराब और नशे का बड़ा हाथ रहा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के कड़े विरोध के कारण होली पर शराब दुकानें बंद रहीं, अन्यथा स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।
बैज ने राज्य के गृह मंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब प्रदेश जल रहा है, तब जिम्मेदार मंत्री कानून-व्यवस्था संभालने के बजाय सोशल मीडिया पर रील बनाने में व्यस्त हैं।
धान खरीदी में लापरवाही: 'पानी डालने' के वीडियो पर घेरा
धान खरीदी केंद्रों (सोसायटियों) में धान पर पानी डाले जाने के वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए बैज ने सरकार की नीतियों को "अमानवीय" बताया। उन्होंने कहा:
- उठाव में देरी: लाखों क्विंटल धान खरीदी केंद्रों में पड़ा हुआ है क्योंकि सरकार समय पर उठाव नहीं कर पा रही है।
- कर्मचारियों पर दबाव: गर्मी से धान का वजन कम होने (सूखने) पर जिम्मेदारी कर्मचारियों की तय कर दी गई है।
- मजबूरी में उठा कदम: वजन पूरा करने के लिए कर्मचारी मजबूरी में धान में पानी डाल रहे हैं। सरकार ने पूरी व्यवस्था को राम-भरोसे छोड़ दिया है।
वित्तीय कुप्रबंधन: "गति और ज्ञान" दोनों फेल
राज्य के बजट और आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि सरकार का “गति और ज्ञान” मॉडल पूरी तरह फेल हो गया है।
"आज प्रदेश का वित्तीय ढांचा चरमरा गया है। मितानिनों और एनएचएम (NHM) कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिल रहा है। रसोइया और अन्य कर्मचारी हड़ताल पर हैं। स्थिति इतनी खराब है कि होली जैसे बड़े त्योहार पर कई गरीब कर्मचारियों के घरों में चूल्हा तक नहीं जल पाया।"
दीपक बैज ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही कानून-व्यवस्था और कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन करेगी।
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