डोंगरगढ़: आस्था और सुरक्षा का अनूठा संगम, माँ बम्लेश्वरी नवरात्र महोत्सव का भव्य समापन
डोंगरगढ़ के माँ बम्लेश्वरी मंदिर में नवरात्र महोत्सव का भव्य समापन। एसपी अंकिता शर्मा के नेतृत्व में राजनांदगांव पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा और पहली बार पुलिस बैंड के साथ हुई माता की ऐतिहासिक आरती ने जीता श्रद्धालुओं का दिल।Puja Sahu
डोंगरगढ़ : छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले धर्मनगरी डोंगरगढ़ में इस वर्ष का चैत्र नवरात्र महोत्सव अपनी भव्यता, अनुशासन और अनूठी पुलिसिंग के लिए यादगार बन गया। रामनवमी के पावन अवसर पर ज्योति विसर्जन के साथ ही दस दिवसीय मेले का शांतिपूर्ण समापन हुआ।
इस बार का आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र रहा, बल्कि राजनांदगांव पुलिस के सेवाभाव और उत्कृष्ट प्रबंधन की नई मिसाल बनकर उभरा।
पुलिस बैंड की धुनों पर पहली बार हुई माँ की आरती
इस नवरात्र का सबसे ऐतिहासिक और भावुक क्षण वह था, जब इतिहास में पहली बार जिला पुलिस बल ने अपने आधिकारिक बैंड के साथ माँ बम्लेश्वरी की महाआरती की। जैसे ही पुलिस बैंड ने मंदिर परिसर में प्रवेश किया, पूरा वातावरण देशभक्ति और भक्ति के अद्भुत मिश्रण से सराबोर हो गया। बैंड की सुमधुर धुनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जो पुलिस और जनता के बीच बढ़ते समन्वय का प्रतीक बना।
एसपी अंकिता शर्मा के नेतृत्व में अभेद्य सुरक्षा घेरा
पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के कुशल नेतृत्व में तैयार की गई सुरक्षा रणनीति ने इस बड़े आयोजन को निर्विघ्न संपन्न कराया। लाखों की भीड़ के बावजूद कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति निर्मित नहीं हुई।
-
24 घंटे मुस्तैदी: पुलिस बल ने पहाड़ी मार्ग, मंदिर परिसर और मेला स्थल पर दिन-रात शिफ्ट में ड्यूटी की।
-
संवेदनशील पुलिसिंग: भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस का मानवीय चेहरा भी सामने आया, जहाँ बुजुर्गों और बच्चों की सहायता को प्राथमिकता दी गई।
-
प्रभावी प्रबंधन: आधुनिक तकनीक और ज़मीनी तैनाती के समन्वय से पूरे दस दिनों तक सुरक्षा चाक-चौबंद रही।
सेवा के बाद लिया माँ का आशीर्वाद
कर्तव्य की वेदी पर डटे रहने के बाद, आयोजन के अंतिम दिन पुलिस बल ने स्वयं भी माता के दरबार में मत्था टेका। ड्यूटी की सफलतापूर्वक समाप्ति पर पुलिस कर्मियों ने आरती-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। यह क्षण उनके समर्पण और अटूट विश्वास को दर्शाता है।
"डोंगरगढ़ का यह नवरात्र महोत्सव एक स्पष्ट संदेश दे गया कि जब सुरक्षा और सेवा का हाथ एक साथ चलता है, तभी आस्था का उत्सव अपने वास्तविक और भव्य स्वरूप में निखरता है।"
इस लेख को शेयर करें
टिप्पणियां (0)
टिप्पणी करने के लिए लॉग इन करें
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है
पहले टिप्पणी करने वाले बनें!
