सुवर्णरेखा तट पर मिला 227 किलो का जिंदा बम डिफ्यूज, सेना ने टाला बड़ा हादसा
पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा में सुवर्णरेखा नदी तट पर मिला 227 किलो का जिंदा बम सेना की 51 इंजीनियर रेजिमेंट ने सफलतापूर्वक डिफ्यूज किया। जानें कैसे लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह की टीम ने इस हाई-रिस्क ऑपरेशन को अंजाम देकर टाला बड़ा हादसा।Puja Sahu
बहरागोड़ा (पूर्वी सिंहभूम): झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपाड़ा-नागुडसाईं में सुवर्णरेखा नदी के तट पर मिले 227 किलो वजनी शक्तिशाली जिंदा बम को भारतीय सेना ने सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया है। सेना की त्वरित कार्रवाई और सटीक रणनीति ने एक संभावित बड़े खतरे को टाल दिया।
रांची की 51 इंजीनियर रेजिमेंट ने संभाला मोर्चा
इस बेहद संवेदनशील और हाई-रिस्क ऑपरेशन को भारतीय सेना की रांची स्थित 51 इंजीनियर रेजिमेंट की बम निरोधक टीम ने अंजाम दिया। ऑपरेशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने किया। टीम में नायब सूबेदार आनंद स्वरूप सिंह, हवलदार कंवलदीप सिंह, हवलदार दलबीर सिंह, नायक सीएएस नौटियाल, लांस नायक मनोज और सैपर पंकज जैसे अनुभवी जांबाज शामिल रहे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: थमी विमानों की उड़ान
बम की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और सेना ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे:
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1 किलोमीटर का दायरा सील: घटनास्थल से एक किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर गांवों को खाली करा लिया गया था।
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हवाई पाबंदी: ऑपरेशन के दौरान नजदीकी कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन से विमानों की उड़ान पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई थी।
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कंट्रोल रूम: ऑपरेशन की निगरानी के लिए घटनास्थल से एक किलोमीटर दूर एक विशेष ऑपरेशन सेंटर बनाया गया था।
वैज्ञानिक तरीके से किया गया विस्फोट
विशेषज्ञों के अनुसार, 227 किलो का यह बम अत्यंत संवेदनशील था। इसे सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के लिए जमीन के अंदर 10 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया। बम को गड्ढे में रखकर चारों ओर से बालू की बोरियों का मजबूत घेरा बनाया गया, ताकि विस्फोट का असर सतह के नीचे ही सीमित रहे और आसपास की संपत्ति को कोई नुकसान न पहुंचे।
ग्रामीणों ने लगाए 'भारत माता की जय' के नारे
सेना की टीम ने मंगलवार को पूरे दिन भौगोलिक स्थिति और नदी के बहाव का बारीकी से अध्ययन किया था। बुधवार को जैसे ही सफलतापूर्वक बम को डिफ्यूज किया गया, इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। सुरक्षा घेरे के बाहर मौजूद ग्रामीणों ने तालियां बजाकर सेना का आभार व्यक्त किया और 'भारत माता की जय' के नारों से आसमान गूंज उठा।
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