होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त रुख: 'दुश्मन' देशों के लिए बंद हो सकते हैं रास्ते, ट्रंप की चेतावनी बेअसर
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ा: ईरान ने दुश्मन देशों के जहाजों के लिए रास्ते सीमित करने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद ईरान अपने रुख पर कायम है। जानिए वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा।"Puja Sahu
तेहरान/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में युद्ध के बादलों के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर वैश्विक तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह बंद तो नहीं करेगा, लेकिन 'दुश्मन' देशों के जहाजों के लिए आवाजाही को सीमित कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी सैन्य चेतावनी के बावजूद ईरान ने अपने कड़े रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है।
ईरान की नई रणनीति: 'समन्वय या पाबंदी'
ईरान के प्रतिनिधि अली मौसवी ने हाल ही में बयान जारी कर ईरान की नई समुद्री नीति को स्पष्ट किया। उनके अनुसार:
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विदेशी जहाजों को इस रास्ते से गुजरने के लिए अब ईरान के साथ अनिवार्य रूप से समन्वय करना होगा।
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यह मार्ग केवल उन्हीं देशों के लिए खुला रहेगा जो ईरान के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया नहीं रखते।
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मौसवी ने क्षेत्र में बिगड़ते हालातों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को जिम्मेदार ठहराया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान होर्मुज को एक 'रणनीतिक हथियार' की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जिससे वह वैश्विक व्यापार को प्रभावित किए बिना चुनिंदा देशों पर दबाव बना सके।
ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम और ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस गतिरोध को देखते हुए ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने होर्मुज के रास्ते को पूरी तरह सुचारू नहीं किया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा और तेल ठिकानों पर विनाशकारी हमला कर सकता है। हालांकि, ईरान ने इस धमकी को दरकिनार करते हुए साफ कर दिया कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा हितों से समझौता नहीं करेगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की आर्थिक रग है। इसके महत्व को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
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तेल आपूर्ति: दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है।
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कीमतों में उछाल: तनाव की खबरों मात्र से ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल शुरू हो गई है। यदि आवाजाही बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
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सप्लाई चेन: भारत सहित कई एशियाई और यूरोपीय देशों की ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर इस मार्ग की स्थिरता पर निर्भर है।
कूटनीति या संघर्ष?
फिलहाल स्थिति 'एक कदम आगे, दो कदम पीछे' वाली बनी हुई है। ईरान जहां टकराव से बचते हुए अपनी शर्तें थोप रहा है, वहीं अमेरिका सैन्य विकल्प खुले रखे हुए है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि दुनिया एक नए ऊर्जा संकट और युद्ध की ओर बढ़ रही है या कूटनीति के जरिए इस मसले का हल निकलेगा।
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