भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता: 2 अरब लोगों के लिए खुलेगा दुनिया का सबसे बड़ा आर्थिक गलियारा
पीएम मोदी ने भारत-EU व्यापार समझौते को बताया 'साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट'। जानें कैसे इस ऐतिहासिक डील से यूरोपीय कार-शराब सस्ती होगी और भारतीय निर्यातकों को मिलेगा 4 बिलियन यूरो का सालाना फायदा।Puja Sahu
नई दिल्ली / ब्रुसेल्स : भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लगभग दो दशकों के लंबे इंतजार और कड़े विचार-विमर्श के बाद एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट' बताया है, वहीं EU अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे दुनिया की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत स्तंभ करार दिया है।
व्यापार के नए युग की शुरुआत: MFN का दर्जा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के लागू होते ही दोनों पक्ष एक-दूसरे को मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा देंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत और EU अब विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत काम करेंगे और वैश्विक मानकों के अलावा एक-दूसरे पर कोई नया आयात-निर्यात प्रतिबंध नहीं लगा सकेंगे।
टैरिफ में भारी कटौती: किसे क्या मिलेगा?
यह समझौता व्यापारिक मूल्य के आधार पर 96.6% उत्पादों पर टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से खत्म या कम करने का मार्ग प्रशस्त करता है:
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यूरोपीय संघ का कदम: EU अपने बाजार का 99.5% हिस्सा भारत के लिए खोल देगा। अधिकांश उत्पादों पर टैरिफ तुरंत या अधिकतम 7 वर्षों में शून्य हो जाएगा।
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भारत का योगदान: भारत अपने व्यापारिक मूल्य के 96% सामानों से टैरिफ हटाएगा।
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यूरोपीय लाभ: यूरोपीय कार निर्माताओं और वाइन/स्पिरिट उत्पादकों को भारतीय बाजार में भारी शुल्क कटौती का लाभ मिलेगा। अनुमान है कि 2032 तक यूरोपीय निर्यात दोगुना हो जाएगा, जिससे उनकी कंपनियों को सालाना 4 बिलियन यूरो की बचत होगी।
भारतीय निर्यातकों के लिए 'गोल्डन चांस'
भारतीय कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण और समुद्री उत्पादों (Seafood) जैसे प्रमुख क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में तुरंत जीरो टैरिफ पहुंच मिलेगी। इससे 'मेक इन इंडिया' उत्पादों की वैश्विक मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है।
डिजिटल सुरक्षा और कृषि हितों का संरक्षण
समझौते में आधुनिक चुनौतियों और स्थानीय चिंताओं का भी ध्यान रखा गया है:
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कृषि सुरक्षा: स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी, चावल, चीनी और बीफ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखा गया है।
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डिजिटल व्यापार: दोनों पक्षों ने निजता को मौलिक अधिकार मानते हुए डिजिटल सहयोग पर सहमति जताई है, हालांकि डेटा सुरक्षा और क्रॉस-बॉर्डर डेटा फ्लो पर संप्रभु अधिकार बरकरार रहेंगे।
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खाद्य सुरक्षा: खाद्य सुरक्षा मानकों को WTO के अनुरूप बनाने पर सहमति बनी है ताकि व्यापार में तकनीकी बाधाएं न आएं।
अगले 10 साल का रोडमैप
यह पूरी प्रक्रिया अगले 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।
यह समझौता वैश्विक जीडीपी के एक बड़े हिस्से और लगभग 2 अरब की आबादी को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा, जो इसे 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक गठबंधन बनाता है।
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