IPS अरुणदेव गौतम बने छत्तीसगढ़ के स्थायी DGP, गृह विभाग ने जारी किया आदेश
छत्तीसगढ़ सरकार ने 1992 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी अरुणदेव गौतम को राज्य का स्थायी (फुल-टाइम) DGP नियुक्त किया है। गृह विभाग ने इसके आधिकारिक आदेश जारी किए। पूरी खबर पढ़ें।Puja Sahu
रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम को राज्य का स्थायी (फुल-टाइम) पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह ने शनिवार (16 मई) को इसके आधिकारिक आदेश जारी किए।
गौतम पिछले 17 महीनों से छत्तीसगढ़ के प्रभारी डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा गृह मंत्रालय को नोटिस भेजे जाने के बाद इस स्थायी नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ।
वीरता और सेवा के लिए मिल चुके हैं कई राष्ट्रपति पदक
1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। उन्हें उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है:
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राष्ट्रपति पुलिस पदक (2018): विशिष्ट सेवा के लिए दिया गया।
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भारतीय पुलिस पदक (2010): सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
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संयुक्त राष्ट्र पदक (2002): संघर्षग्रस्त देश कोसोवो में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दी गई सेवाओं के लिए मिला।
कानपुर से जेएनयू और फिर आईपीएस तहक का सफर
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर (ग्राम अभयपुर) के रहने वाले अरुणदेव गौतम का जन्म 2 जुलाई 1967 को हुआ था। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से की। उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज, इलाहाबाद से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कला (Arts) में बीए और फिर राजनीति शास्त्र में एमए किया। इसके बाद देश की प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU), नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की डिग्री हासिल की। 12 अक्टूबर 1992 को वे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए। शुरुआत में उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला था।
संकट के समय हमेशा सरकार के 'ट्रबलशूटर' रहे
अरुणदेव गौतम को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 7 जिलों में एसपी के रूप में काम करने का लंबा अनुभव है। उन्होंने हमेशा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कमान संभाली है:
राजनांदगांव नक्सली हमला (2009)
वर्ष 2009 में राजनांदगांव में एक बड़े नक्सली हमले में एसपी सहित 29 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस भीषण संकट के बाद सरकार ने अरुणदेव गौतम पर भरोसा जताया और उन्हें वहां का एसपी बनाकर भेजा, जहां उन्होंने स्थिति को संभाला।
झीरम घाटी कांड (2013)
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में हुए भयानक नक्सली हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सहित कई लोग मारे गए थे। इस झटके के तुरंत बाद अरुणदेव गौतम को बस्तर रेंज का आईजी (IG) बनाया गया। उन्होंने न सिर्फ वहां सुरक्षा व्यवस्था सुधारी, बल्कि कुछ ही महीनों बाद नवंबर-दिसंबर में हुए विधानसभा चुनावों को बेहद शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न कराया, जिससे बस्तर में वोटिंग प्रतिशत में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
करियर का सफरनामा: एमपी से छत्तीसगढ़ तक
शुरुआती पोस्टिंग (मध्य प्रदेश): प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में जबलपुर में तैनात हुए। इसके बाद बिलासपुर में सीएसपी, कवर्धा में एसडीओपी और भोपाल में एडिशनल एसपी रहे। एमपी पुलिस की 23वीं बटालियन के कमांडेंट रहे और एसपी के तौर पर उनका पहला जिला राजगढ़ था।
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छत्तीसगढ़ कैडर का चयन: साल 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद उन्होंने इस नए राज्य को चुना। वे यहां कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जिलों के एसपी रहे।
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प्रशासनिक अनुभव: डीआईजी बनने के बाद उन्होंने पुलिस मुख्यालय (PHQ), सीआईडी, वित्त और योजना, प्रशासन, और मुख्यमंत्री सुरक्षा जैसे बेहद महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
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अतिरिक्त प्रभार: पिछले कुछ वर्षों से वे छत्तीसगढ़ के गृह सचिव का पद संभाल रहे थे, साथ ही उनके पास जेल, परिवहन विभाग, नगर सेना (Home Guards) और अग्निशमन (Fire Services) सेवाओं का भी अतिरिक्त प्रभार था।
अब फुल-टाइम डीजीपी बनने के बाद राज्य की कानून व्यवस्था को और मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद अहम होने वाली है।
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