ईरान संकट गहराया: $100 के पार जा सकता है कच्चा तेल, क्या भारत में ₹14 तक महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार जा सकती हैं। जानें भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों पर इसका क्या असर होगा और क्यों ₹14 तक बढ़ सकते हैं भाव।Puja Sahu
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और ईरान पर हुए ताज़ा हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण तेल बाज़ार में घबराहट का माहौल है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें वर्तमान में 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं, और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो यह आंकड़ा जल्द ही 100 डॉलर के पार जा सकता है।
भारत पर सीधा असर: जेब पर पड़ेगा भारी बोझ
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85-90% हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली मामूली हलचल भी भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर बड़ा असर डालती है। बाज़ार विशेषज्ञों की मानें तो यदि कच्चे तेल की कीमतें $100 तक पहुंचती हैं, तो तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दामों में 12 से 14 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी कर सकती हैं।
समझिए गणित: तेल की कीमतों का आपके बजट से कनेक्शन
भारत में तेल की कीमतें अब सरकारी नियंत्रण में नहीं हैं। जून 2010 में पेट्रोल और अक्टूबर 2014 में डीजल को 'डी-रेगुलेट' (सरकारी नियंत्रण से मुक्त) कर दिया गया था। अब तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) हर सुबह 6 बजे नई कीमतें तय करती हैं।
दाम बढ़ने का वैज्ञानिक आधार:
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एक बैरल में तेल: 159 लीटर।
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$1 की बढ़ोतरी का असर: जब कच्चे तेल की कीमत 1 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है, तो प्रति लीटर लागत में लगभग 0.006 डॉलर का इजाफा होता है।
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रुपये की भूमिका: यदि डॉलर की कीमत 91 रुपये है, तो प्रति लीटर बढ़ोतरी करीब 57 पैसे बैठती है।
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दोहरी मार: यदि संकट के कारण रुपया गिरकर 92 या 93 के स्तर पर आता है, तो यह असर 65 पैसे प्रति लीटर से भी अधिक हो सकता है।
डायनेमिक प्राइसिंग: हर सुबह बदलता है भाव
भारत में 16 जून 2017 से 'डायनेमिक फ्यूल प्राइसिंग' लागू है। इसके तहत पिछले 15 दिनों के अंतरराष्ट्रीय औसत दाम और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को आधार बनाया जाता है। वर्तमान ईरान संकट ने न केवल कच्चे तेल को महंगा किया है, बल्कि रुपये की स्थिति को भी अस्थिर कर दिया है, जिससे भारतीय ग्राहकों को 'दोहरी मार' पड़ने की आशंका है।
"होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। यदि यहाँ आपूर्ति बाधित होती है, तो वैश्विक बाज़ार में तेल की कमी हो जाएगी, जिसका सबसे बुरा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा।"
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