ईरान-अमेरिका जंग: "14 दिन की जंग में अमेरिका को भीख मंगवा दी," ईरानी विदेश मंत्री का तीखा पलटवार
ईरान-अमेरिका जंग के बीच तेहरान का बड़ा दावा! विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि 14 दिन की जंग ने अमेरिका को 'भीख' मांगने पर मजबूर कर दिया है। ट्रंप प्रशासन अब भारत सहित दुनिया से रूस का तेल खरीदने की अपील कर रहा है ताकि $100 के पार पहुंची कच्चे तेल की कीमतों को रोका जा सके। जानिए क्या है पूरी खबर।Puja Sahu
तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब कड़े बयानों की जंग में तब्दील हो चुका है। खर्ग द्वीप को तबाह करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद, ईरान ने अब तक का सबसे तीखा कटाक्ष किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दावा किया है कि महज दो हफ्तों की जंग ने शक्तिशाली अमेरिका को घुटनों पर ला दिया है और अब वह दुनिया के सामने 'भीख' मांग रहा है।
"दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा है व्हाइट हाउस"
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए वाशिंगटन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
"मात्र 14 दिन की जंग में हमने अमेरिका से भीख मंगवा दी है। जो अमेरिका कल तक भारत और अन्य देशों पर रूसी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा था, आज वही व्हाइट हाउस दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा है कि वे रूस से तेल खरीदें ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।"
अरागची ने इसे अमेरिका की मजबूरी बताते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़कर अमेरिका खुद अपने जाल में फंस गया है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बिगाड़ा अमेरिका का खेल
मौजूदा तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज : ईरान के साथ युद्ध के कारण इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में बाधा उत्पन्न हुई है, जहाँ से दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार गुजरता है।
- सप्लाई चेन बाधित: जंग की वजह से तेल की वैश्विक आपूर्ति रुक गई है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
इसी संकट को देखते हुए, ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में दुनिया के देशों को रूस से तेल खरीदने की 30 दिनों की अस्थायी छूट देने की घोषणा की है।
भारत की भूमिका और अमेरिका की 'अस्थायी छूट'
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया था कि वाशिंगटन ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दे दी है। बेसेंट ने कहा कि भारतीय 'अच्छे एक्टर' रहे हैं और उन्होंने पहले अमेरिका के अनुरोध पर रूसी तेल की खरीद कम की थी, लेकिन बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए अब उन्हें यह छूट दी जा रही है।
ईरानी विदेश मंत्री ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि यह अमेरिका की नीतिगत हार है। उन्होंने यूरोपीय देशों को भी चेताया कि अमेरिका की इस 'अवैध जंग' का समर्थन करना उनके लिए 'बकवास सोच' के अलावा कुछ नहीं है।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान के साथ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट भी साझा की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रूस की कमाई में भारी इजाफा हो रहा है। ईरान का तर्क है कि अमेरिका जिस रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहता था, ईरान के साथ युद्ध ने उसी रूस की तिजोरी भरने का काम किया है।
ट्रंप प्रशासन के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती वाली है। एक तरफ वह ईरान पर सैन्य दबाव बनाना चाहता है, तो दूसरी तरफ घरेलू और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को काबू में रखना उसकी प्राथमिकता बन गई है। फिलहाल, ईरान के इस 'भीख' वाले बयान ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
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