विधानसभा में गूंजा बस्तर के किसानों का मुद्दा, कवासी लखमा और खाद्य मंत्री के बीच तीखी बहस
छत्तीसगढ़ विधानसभा में बस्तर के धान खरीदी मुद्दे पर भारी हंगामा। विधायक कवासी लखमा ने आदिवासी किसानों के धान न बिकने और आंध्र प्रदेश में जाकर बेचने का आरोप लगाया, वहीं खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने दावों को नकारा।Puja Sahu
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज बस्तर संभाग में धान खरीदी को लेकर सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ। पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने आदिवासी किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार को घेरते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
कवासी लखमा के तीखे सवाल
विधायक कवासी लखमा ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से बस्तर संभाग में धान उपार्जन का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि आखिर आदिवासी समाज के लोगों का धान क्यों नहीं खरीदा गया? उन्होंने कहा:
- आर्थिक संकट: धान की खरीदी न होने के कारण बस्तर के किसान अपना KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन नहीं चुका पा रहे हैं।
- पलायन की स्थिति: छत्तीसगढ़ में धान न बिकने के कारण बस्तर के किसान मजबूरन आंध्र प्रदेश जाकर अपना धान बेच रहे हैं।
- झूठे वादे: सरकार ने चुनाव से पहले घोषणा पत्र में बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन हकीकत में किसानों को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
- फर्जी मुकदमे: लखमा ने आरोप लगाया कि किसानों की मदद करने के बजाय उन पर केस दर्ज कर उन्हें फंसाया जा रहा है। उन्होंने सदन की पटल पर उन किसानों की सूची रखने की बात भी कही जो बाहर जाकर धान बेच रहे हैं।
खाद्य मंत्री का पलटवार
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा:
- रिकॉर्ड खरीदी: सरकार ने सभी पंजीकृत किसानों का धान खरीदा है। यह कहना पूरी तरह गलत है कि किसानों का धान नहीं लिया गया।
- अनुपस्थिति का तर्क: मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि यदि किसान स्वयं केंद्र पर उपस्थित नहीं होंगे, तो धान की खरीदी कैसे संभव होगी?
विपक्ष का हंगामा और वॉकआउट की स्थिति
खाद्य मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस के विधायक दल ने सदन में जमकर नारेबाजी की। विपक्ष का कहना था कि सरकार जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ रही है और बस्तर के आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही में काफी व्यवधान आया।
बस्तर में धान खरीदी का मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है, क्योंकि विपक्ष ने इसे किसानों की अस्मिता और वादे खिलाफी से जोड़ दिया है।
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