केरल बना ‘केरलम’, तो बंगाल क्यों नहीं? ममता बनर्जी ने केंद्र पर लगाया ‘बंगाल विरोधी’ होने का आरोप
केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने को केंद्र की मंजूरी के बाद ममता बनर्जी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना। बंगाल सीएम ने लगाया राजनीतिक भेदभाव का आरोप और पूछा- 'बांग्ला' नाम का प्रस्ताव वर्षों से क्यों है लंबित?Puja Sahu
नई दिल्ली/कोलकाता: केंद्र सरकार द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद देश में एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मोदी सरकार पर ‘राजनीतिक भेदभाव’ का गंभीर आरोप लगाया है। ममता बनर्जी का कहना है कि जहां केरल के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई, वहीं पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव वर्षों से केंद्र के पास लंबित पड़ा है।
"केरल में भाजपा-माकपा की मिलीभगत"
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि यह फैसला केंद्र की पक्षपाती मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में सत्तारूढ़ माकपा (CPIM) और भाजपा के बीच 'आंतरिक मिलीभगत' है, जिसके कारण वहां का रास्ता साफ कर दिया गया।
ममता ने कड़े शब्दों में कहा:
"चूंकि वे ‘बंगाल विरोधी’ हैं, इसलिए हमारे प्रस्तावों को कभी स्वीकार नहीं करते। बंगाल के जायज अधिकारों को हमेशा नकारा गया है। हमने विधानसभा में बिल पास कर कई बार केंद्र को भेजा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।"
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नाम बदलने के पीछे का तर्क: 'W' का झंझट और सांस्कृतिक पहचान पश्चिम बंगाल विधानसभा ने जुलाई 2018 में सर्वसम्मति से राज्य का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव पारित किया था। टीएमसी का तर्क है कि:
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सांस्कृतिक प्रतीक: 'बांग्ला' नाम राज्य के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति का प्रतिबिंब है।
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प्रशासनिक समस्या: वर्णानुक्रम (Alphabetical order) के कारण 'West Bengal' का नाम 'W' से शुरू होता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय बैठकों में बंगाल के प्रतिनिधियों को अंत में बोलने का मौका मिलता है और उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है।
चुनाव से पहले गरमाया मुद्दा
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी तेज है। टीएमसी जहां चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पीएम मोदी और अमित शाह पर तंज कसते हुए इसे 'मगरमच्छ के आंसू' करार दिया। पार्टी ने कहा कि चुनाव के समय भाजपा नेता बंगाल की संस्कृति के प्रति प्रेम का ढोंग करते हैं, लेकिन असलियत में वे ‘बांग्ला-विरोधी’ हैं।
ममता बनर्जी की इस नाराजगी ने एक बार फिर केंद्र-राज्य संबंधों और क्षेत्रीय अस्मिता की बहस को राष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि क्या चुनावी दबाव के बीच केंद्र सरकार बंगाल के इस पुराने प्रस्ताव पर कोई कदम उठाती है या नहीं।
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