अम्बिकापुर में सजेगा खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का मंच: कल से 30 राज्यों के पहलवान दिखाएंगे दमखम
छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में 28 मार्च से 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026' का आगाज़ हो रहा है। गांधी स्टेडियम में आयोजित इस कुश्ती स्पर्धा में 30 राज्यों के 144 जनजातीय पहलवान अपना दम दिखाएंगे। डीडी स्पोर्ट्स पर लाइव देखें सरगुजा की धरती का यह ऐतिहासिक दंगल।Puja Sahu
अम्बिकापुर/रायपुर : छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला एक ऐतिहासिक खेल आयोजन का साक्षी बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। देश के पहले 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026' की कुश्ती स्पर्धा की मेजबानी इस बार अम्बिकापुर को सौंपी गई है। कल यानी 28 मार्च से शहर के हृदय स्थल गांधी स्टेडियम में देश भर के जनजातीय पहलवानों का महाकुंभ शुरू होने जा रहा है।
राष्ट्रीय मंच पर चमकेगी वनांचलों की प्रतिभा
इस आयोजन का मुख्य ध्येय सुदूर वनांचलों में छिपी खेल प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें राष्ट्रीय फलक पर पहचान दिलाना है। यह आयोजन न केवल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
प्रतियोगिता की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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प्रतिभागी: जम्मू-कश्मीर, झारखंड, असम, महाराष्ट्र और मेजबान छत्तीसगढ़ सहित कुल 30 राज्यों के खिलाड़ी।
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कुल खिलाड़ी: 144 रेसलर्स (पुरुष एवं महिला वर्ग)।
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स्थान: गांधी स्टेडियम, अम्बिकापुर।
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अवधि: 28 मार्च से 31 मार्च 2026 तक।
चार दिनों तक चलेगा कुश्ती का रोमांच
यह प्रतियोगिता चार दिनों तक चलेगी, जिसमें प्रतिदिन तीन चरणों में मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। खेल विभाग ने दर्शकों और खिलाड़ियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित समय सारणी तय की है:
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प्रथम चरण प्रातः 8:00 बजे से 9:00 बजे तक
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द्वितीय चरण प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक
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तृतीय चरण सायं 4:00 बजे से खेल समाप्ति तक
दुनिया देखेगी सरगुजा का दंगल: डीडी स्पोर्ट्स पर लाइव
"भारत के जनजातीय खेल, छत्तीसगढ़ मा सुंदर मेल" की प्रेरणादायी टैगलाइन के साथ इस आयोजन को भव्य रूप दिया गया है। खेल प्रेमियों के लिए सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि इन मुकाबलों का सीधा प्रसारण डीडी स्पोर्ट्स और प्रसार भारती पर किया जाएगा। इससे न केवल स्टेडियम में मौजूद दर्शक, बल्कि देशभर के लोग सरगुजा की धरती पर हो रहे इस रोमांच को लाइव देख सकेंगे।
तैयारियां पूर्ण, खिलाड़ियों का भव्य स्वागत
प्रशासन द्वारा खिलाड़ियों के ठहरने, भोजन, चिकित्सा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। खेल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की 'अतिथि देवो भव' परंपरा का पालन करते हुए सभी राज्यों से आने वाले खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। सरगुजा अब अपनी पारंपरिक संस्कृति के साथ-साथ देश को नई खेल ऊर्जा देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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