लद्दाख की हुंकार: सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद भी थमा नहीं आंदोलन, पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए विशाल प्रदर्शन
लद्दाख में पूर्ण राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर लेह एपेक्स बॉडी (LAB) का विशाल प्रदर्शन। सोनम वांगचुक की रिहाई के बावजूद 16 मार्च को आंदोलन जारी रखने का फैसला। जानिए क्या हैं लद्दाख की मुख्य मांगें।Puja Sahu
लेह/कारगिल: लद्दाख में अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक पहचान की बहाली को लेकर चल रहा आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने केंद्र सरकार के अनुरोध को दरकिनार करते हुए 16 मार्च को पूर्व निर्धारित विशाल विरोध प्रदर्शन को जारी रखने का ऐलान किया है।
लद्दाख के लोगों का स्पष्ट कहना है कि जब तक 'पूर्ण राज्य का दर्जा' और 'छठी अनुसूची' के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांगें पूरी नहीं होतीं, पहाड़ों से उठने वाली यह आवाज शांत नहीं होगी।
सोनम वांगचुक की रिहाई: एक 'स्वागत योग्य' कदम, पर अधूरा न्याय
केंद्र सरकार ने हाल ही में आंदोलनकारी समूहों को शांत करने के प्रयास के तहत प्रमुख जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर लगी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है। LAB के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरुक ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा:
"सोनम वांगचुक की रिहाई से लद्दाख के लोगों को सम्मान और राहत मिली है। इस घटनाक्रम ने उन पर लगाए गए सभी बेबुनियाद आरोपों की पोल खोल दी है। हालांकि, यह हमारे आंदोलन की आंशिक जीत है, अंतिम लक्ष्य अभी बाकी है।"
उपराज्यपाल की अपील खारिज
सूत्रों के मुताबिक, लद्दाख के उपराज्यपाल ने विरोध प्रदर्शन से पहले लेह एपेक्स बॉडी से संपर्क किया था और 16 मार्च के प्रदर्शन को रद्द करने की अपील की थी। इसके जवाब में नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि आंदोलन का फैसला सामूहिक है और किसी एक व्यक्ति या संगठन द्वारा इसे अकेले वापस नहीं लिया जा सकता। KDA और अन्य संबंधित पक्षों के साथ गहन चर्चा के बाद सर्वसम्मति से विरोध को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
लद्दाख की प्रमुख मांगें
पिछले छह वर्षों से केंद्र शासित प्रदेश के लोग खुद को लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से वंचित महसूस कर रहे हैं। आंदोलन की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के बजाय एक पूर्ण राज्य बनाया जाए।
- छठी अनुसूची: जनजातीय आबादी और लद्दाख की संवेदनशील पारिस्थितिकी (Ecology) की रक्षा के लिए संवैधानिक कवच।
- नौकरी और भूमि सुरक्षा: स्थानीय निवासियों के लिए जमीन और रोजगार के विशेष अधिकार।
- संसदीय प्रतिनिधित्व: लोकसभा और राज्यसभा में लद्दाख के प्रतिनिधित्व का विस्तार।
आगे की राह
चेरिंग दोरजे लकरुक ने जोर देकर कहा कि 16 मार्च का प्रदर्शन केवल एक सभा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के लिए एक संदेश है कि लद्दाख की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है। सोनम वांगचुक की रिहाई ने प्रदर्शनकारियों के मनोबल को और ऊंचा कर दिया है।
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