कांकेर में रेत माफिया बेखौफ: चैन माउंटेन मशीनों से महानदी का अस्तित्व खतरे में, खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल
कांकेर के बासनवाही में महानदी से दिन-रात रेत का अवैध उत्खनन जारी है। चैन माउंटेन मशीनों से हो रही तस्करी और खनिज विभाग की चुप्पी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।Puja Sahu
कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में खनिज संपदा की सरेआम लूट जारी है। चारामा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम बासनवाही में महानदी के तटों पर रेत माफिया पूरी तरह हावी हैं। यहाँ नियमों को ताक पर रखकर दिन-रात चैन माउंटेन मशीनों के जरिए नदी का स्वरूप बिगाड़ा जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार खनिज विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
मशीनों से खुदाई, सैकड़ों हाईवा से तस्करी
स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बासनवाही स्थित महानदी में अवैध उत्खनन का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। यहाँ भारी-भरकम मशीनों (चैन माउंटेन) का उपयोग कर नदी की गहराई तक खुदाई की जा रही है। रोजाना सैकड़ों हाईवा रेत भरकर अन्य क्षेत्रों और राज्यों में खपाई जा रही है। इस अवैध कारोबार से शासन को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व की चपत लग रही है।
पर्यावरण और जलस्तर पर गहराता संकट
रेत के इस अंधाधुंध दोहन ने पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है:
-
नदी का स्वरूप: लगातार खुदाई से महानदी का प्राकृतिक प्रवाह और तट प्रभावित हो रहे हैं।
-
जलस्तर में गिरावट: रेत की परत कम होने से आसपास के गांवों का भू-जल स्तर नीचे जा रहा है।
-
कटाव का खतरा: किनारों के अत्यधिक दोहन से भविष्य में बाढ़ और भूमि कटाव का खतरा बढ़ गया है।
"प्रशासन को सब पता है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अगर यही हाल रहा तो हमारी नदी सिर्फ कागजों में रह जाएगी।" — स्थानीय ग्रामीण
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद खनिज विभाग और जिला प्रशासन मौन है। कार्रवाई के अभाव में रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों की लूट मचा रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि इस मौन के पीछे कहीं न कहीं सांठगांठ की बू आ रही है।
ग्रामीणों की मांग: हो निष्पक्ष जांच
बासनवाही और आसपास के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध उत्खनन पर जल्द रोक नहीं लगाई गई, तो महानदी के अस्तित्व को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
इस लेख को शेयर करें
टिप्पणियां (0)
टिप्पणी करने के लिए लॉग इन करें
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है
पहले टिप्पणी करने वाले बनें!
