"हमारी सरकार में डाकुओं को सुरक्षा मिल रही, तो साधु-संतों को क्यों नहीं?" – पंडित युवराज के आंसुओं पर मंत्री राजेश अग्रवाल का बड़ा बयान
रायपुर के खिलौरा ग्राउंड में चल रही इस शिव महापुराण कथा में हज़ारों की संख्या में भक्त उमड़ रहे हैं। युवराज पांडेय का आरोप है कि अन्य राज्यों से आने वाले कथावाचकों को प्रोटोकॉल के तहत भारी सुरक्षा दी जाती है, लेकिन स्थानीय कथावाचक होने के नाते उन्हें और उनके अनुयायियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।Puja Sahu
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के खिलौरा ग्राउंड में चल रही पंडित युवराज पांडेय की कथा इन दिनों केवल आध्यात्मिक चर्चा का केंद्र नहीं, बल्कि एक बड़े सियासी विवाद का अखाड़ा बन गई है। 19 जनवरी से शुरू हुए इस भव्य आयोजन में रोजाना हजारों श्रद्धालु जुट रहे हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगली उठा दी है।
मंच से छलका 'छत्तीसगढ़िया' होने का दर्द
पंडित युवराज पांडेय ने मंच से भावुक होकर प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि क्या स्थानीय या "छत्तीसगढ़िया" होने के कारण प्रशासन उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देने में आनाकानी कर रहा है? प्रशासन को आयोजन की पूर्व सूचना देने के बाद भी पर्याप्त बल तैनात न किए जाने पर उन्होंने अपनी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई।
"हम तो डाकुओं को भी सुरक्षा देते हैं": राजेश अग्रवाल
इस मुद्दे पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरकार का बचाव करते हुए इसे 'सनातन की सरकार' बताया। उन्होंने कहा "हमारी सनातन की सरकार है, सुरक्षा कैसे नहीं मिलेगी? हमारे गृहमंत्री कहते हैं कि संतों को पलकों पर बैठाकर लाएंगे। हम तो डाकुओं को सुरक्षा दे देते हैं, फिर ये तो साधु-संत हैं।" उनके इस बयान ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार इस मामले को धार्मिक और सुरक्षा के चश्मे से देख रही है। आरोपों का खंडन करते हुए उन्होंने कहा यह सरकार धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, प्रशासन नियमतः सुरक्षा उपलब्ध करा रहा है और किसी भी प्रकार की कमी को दूर किया जाएगा।
पंडित युवराज के दावे के बाद अब प्रदेश में बहस छिड़ गई है। इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है। क्या छत्तीसगढ़िया कथावाचकों की जानबूझकर अनदेखी की जाती है? क्या आयोजन की पूर्व सूचना के बाद भी स्थानीय कथावाचकों के पंडालों को वह तवज्जो और सुरक्षा नहीं मिलती जो बाहरी राज्यों से आने वालों को मिलती है? आरोप तो यह भी लग रहे हैं कि कुछ बाहरी बाबाओं की आवभगत में प्रोटोकॉल को ताक पर रखकर सरकारी सुविधाओं का बेजा इस्तेमाल किया जाता है, जबकि स्थानीय संतों को अपनी सुरक्षा के लिए भी गुहार लगानी पड़ती है।
विपक्ष का हमला और प्रशासनिक सक्रियता
विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए सरकार पर बाहरी लोगों को ज्यादा महत्व देने का आरोप लगाया है। हालांकि, विवाद के तूल पकड़ते ही और पंडित युवराज का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। वर्तमान में खिलौरा ग्राउंड के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है और व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
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