मोदी सरकार का 'फ्यूल रिलीफ' : पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 घटी, डीजल पर हुई 'जीरो'; क्या अब आपकी जेब को मिलेगी राहत?
ग्लोबल सप्लाई संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 घटाकर ₹3 की गई और डीजल पर इसे 'जीरो' कर दिया गया है। जानें तेल कंपनियों को मिली इस राहत के बाद क्या आपके शहर में कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?Puja Sahu
नई दिल्ली : वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर मचे हाहाकार के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता और तेल कंपनियों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को घटाकर ऐतिहासिक स्तर पर लाने का फैसला किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य तेल कंपनियों को उस वित्तीय दबाव से बचाना है, जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीदने के कारण झेलना पड़ रहा था।
एक्साइज ड्यूटी में कितना हुआ बदलाव?
सरकार द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल पर टैक्स की संरचना को पूरी तरह बदल दिया गया है:
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पेट्रोल: पहले एक्साइज ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर थी, जिसे ₹10 घटाकर अब ₹3 कर दिया गया है।
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डीजल: डीजल पर लगने वाली ₹10 की एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह खत्म (जीरो) कर दिया गया है।
यह कटौती केंद्र सरकार के टैक्स पर की गई है। राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT) पहले की तरह ही लागू रहेगा।
क्या सस्ता होगा आपकी जेब के लिए ईंधन?
आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पंप पर तेल की कीमतें कम होंगी? इसका गणित सीधा है:
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₹10 तक की कमी की संभावना: चूंकि सरकार ने ड्यूटी में ₹10 की कटौती की है, यदि तेल कंपनियां इस राहत का लाभ सीधे उपभोक्ताओं को देती हैं, तो पेट्रोल-डीजल के दाम ₹10 प्रति लीटर तक गिर सकते हैं।
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कंपनियों का फैसला अहम: अभी तक केवल सरकार ने टैक्स घटाया है। अंतिम कीमतों में कटौती का फैसला तेल कंपनियों के विवेक और उनके घाटे की भरपाई पर निर्भर करेगा।
पैनिक बाइंग पर लगाम: "देश में तेल का भंडार पर्याप्त"
पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर उमड़ रही भारी भीड़ और 'पैनिक बाइंग' को देखते हुए सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि भारत के पास तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
तेल कंपनियां निरंतर विदेशों से कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। अफवाहों पर ध्यान न दें; देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है।
सरकार के इस कदम ने न केवल तेल कंपनियों को संकट के समय ऑक्सीजन दी है, बल्कि कीमतों में संभावित कटौती की उम्मीद जगाकर जनता को भी बड़ी मनोवैज्ञानिक राहत दी है।
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