राजधानी की सड़कों से हटेंगे 'छातिम' के पेड़? विधायक सुनील सोनी ने विधानसभा में उठाया स्वास्थ्य का मुद्दा
रायपुर में सांस की बीमारियों और अस्थमा के बढ़ते खतरों को देखते हुए हजारों 'छातिम' के पेड़ों को हटाने की तैयारी है। बीजेपी विधायक सुनील सोनी ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए मंत्री ओपी चौधरी से कार्रवाई की मांग की है। जानें क्या है पूरा मामला।Puja Sahu
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की हरियाली में बड़ी भूमिका निभाने वाले 'छातिम' के पेड़ों पर अब कुल्हाड़ी चल सकती है। विधानसभा में बीजेपी विधायक सुनील सोनी द्वारा उठाए गए एक गंभीर मुद्दे के बाद सरकार इन पेड़ों को हटाने की तैयारी कर रही है। विधायक का दावा है कि ये पेड़ शहरवासियों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।
सांस की बीमारियों का कारण बन रहा 'छातिम'
पूर्व सांसद और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने सदन में ध्यानाकर्षण के दौरान कहा कि रायपुर में हजारों की संख्या में लगे छातिम के पेड़ों से निकलने वाले परागकण और गंध लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि:
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इन पेड़ों के कारण शहर में अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
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लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।
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यह पेड़ गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम भरा साबित हो सकता है।
अन्य राज्यों का दिया हवाला
सुनील सोनी ने अपनी मांग को मजबूती देते हुए कहा कि केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों ने भी इनके दुष्प्रभावों को देखते हुए छातिम के पेड़ों को हटाने का निर्णय लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनहित और स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए रायपुर से भी इन पेड़ों का सफाया जरूरी है।
मंत्री ओपी चौधरी ने दिया आश्वासन
इस संवेदनशील मामले पर विभागीय मंत्री ओपी चौधरी ने त्वरित संज्ञान लिया है। विधायक सोनी के अनुसार, मंत्री ने सदन में आश्वस्त किया है कि सरकार इस विषय पर जल्द ही उचित और प्रभावी कार्रवाई करेगी। विशेषज्ञों से परामर्श के बाद इन पेड़ों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
क्या है 'छातिम' का विवाद?
छातिम, जिसे 'सप्तपर्णी' भी कहा जाता है, अपनी घनी छाया और तेजी से बढ़ने की क्षमता के कारण शहरों में खूब लगाया गया था। हालांकि, इसके फूलों की तीव्र गंध और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के कारण अब देश के कई हिस्सों में इसे 'विलेन' माना जाने लगा है।
आगे क्या?
अब देखना यह होगा कि वन विभाग और नगर निगम इस दिशा में क्या योजना बनाते हैं। क्या इन पेड़ों के बदले नए 'एयर प्यूरीफायर' पौधे लगाए जाएंगे? राजधानी के पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।
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