रायपुर में कचरा संकट: निगम और रामकी कंपनी के विवाद से डोर-टू-डोर कलेक्शन ठप, सड़कों पर कचरे का अंबार
रायपुर में नगर निगम और रामकी कंपनी के बीच ₹78 करोड़ के भुगतान विवाद और ड्राइवरों की हड़ताल के कारण डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन ठप हो गया है। शहर में कचरा संकट गहराने के आसार हैं।Puja Sahu
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले एक हफ्ते से शहर के कई इलाकों में कचरा गाड़ियां नहीं पहुंची हैं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
लोग घरों के बाहर डस्टबिन लेकर गाड़ियों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम और कचरा कलेक्शन एजेंसी के बीच चल रहे भुगतान विवाद के कारण व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। इस मुद्दे को लेकर अब शहर में तीखी सियासत भी शुरू हो गई है।
मार्च 2025 से 78 करोड़ का भुगतान बकाया, कंपनी ने रोके हाथ
शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही मेसर्स DSW रामकी कंपनी ने फंड की कमी का हवाला देते हुए काम रोक दिया है। कंपनी का आरोप है कि नगर निगम ने मार्च 2025 से अब तक का करीब 78 करोड़ रुपए का भुगतान अटका कर रखा है।
दूसरी ओर, कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें केवल आंशिक (टुकड़ों में) भुगतान किया जा रहा है, जबकि गाड़ियों के संचालन और रखरखाव की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
वेतन वृद्धि को लेकर ड्राइवरों की हड़ताल
इस वित्तीय संकट के बीच कंपनी के ड्राइवरों ने भी मोर्चा खोल दिया है। ड्राइवर वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि:
- वर्तमान में कलेक्टर दर पर भुगतान तो हो रहा है, लेकिन पुराने ड्राइवरों के वेतन में लंबे समय से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
- निगम और कंपनी प्रबंधन के सामने कई बार मांगें रखी गईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
- नतीजा, कर्मचारियों को मजबूरन काम बंद करना पड़ा।
269 गाड़ियां और 800 कर्मचारी संभालते हैं जिम्मा
रायपुर और नवा रायपुर से हर दिन करीब 750 टन कचरा निकलता है। इसे संकरी स्थित प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाने के लिए रोजाना 269 वाहन और लगभग 800 कर्मचारी काम पर लगते हैं। इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए हर महीने करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, जो भुगतान न मिलने के कारण अब बंद है।
2018 से चल रहा है PPP मॉडल का अनुबंध
रामकी कंपनी साल 2018 से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत रायपुर की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था संभाल रही है। नगर निगम के साथ कंपनी का 15 साल का अनुबंध है। शर्तों के मुताबिक, तय अवधि पूरी होने के बाद कचरा प्लांट और सभी संसाधन नगर निगम को सौंप दिए जाएंगे। लेकिन वर्तमान में भुगतान और संचालन को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर है।
निगम के सामने खड़ा हुआ बड़ा संकट
यदि यह हड़ताल और गतिरोध लंबे समय तक जारी रहा, तो रायपुर में कचरा निपटान का एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
- डंपिंग यार्ड फुल: शहर का पुराना डंपिंग एरिया लगभग पूरी तरह भर चुका है।
- पर्यावरणीय आपत्ति: नई जगहों पर कचरा फेंकने से पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और आपत्तियों का खतरा मंडरा रहा है।
- सड़कों पर कचरा: आने वाले दिनों में अगर गाड़ियां नहीं चलीं, तो मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर कचरे का दबाव और बदबू असहनीय हो जाएगी।
महापौर बोलीं- जल्द निकलेगा समाधान
इस पूरे विवाद और शहर की बदहाल होती व्यवस्था पर रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने कहा कि स्थिति को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। रामकी कंपनी के उच्च अधिकारियों से लगातार बातचीत जारी है। जल्द ही भुगतान और वेतन के इस विवाद को सुलझा लिया जाएगा और शहर में दोबारा डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की गाड़ी दौड़ने लगेगी।
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