रायपुर से संचालित 'इंटरनेशनल ठगी' का पर्दाफाश: 3 फर्जी कॉल सेंटर पर छापा, 42 गिरफ्तार
रायपुर पुलिस ने 3 फर्जी कॉल सेंटरों पर छापा मारकर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। अहमदाबाद और चीन से जुड़े तार, 42 आरोपी गिरफ्तार। जानें कैसे UAE के नागरिकों को लोन और CIBIL के नाम पर ठगा जा रहा था।Puja Sahu
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अब केवल व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह भी बनती जा रही है। जिला पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए तीन फर्जी कॉल सेंटरों पर एक साथ दबिश दी। इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल 42 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो सात समंदर पार बैठे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नागरिकों को अपना शिकार बना रहे थे।
छापेमारी और पुलिस की रणनीति
रायपुर के राजेंद्र नगर और गंज थाना क्षेत्र में पुलिस को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टावर में कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। क्राइम और साइबर पुलिस की संयुक्त टीम ने जब इन ठिकानों पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। वहां हाई-टेक संसाधनों के साथ अवैध कॉल सेंटर संचालित किए जा रहे थे।
गुजरात से जुड़ा है 'मास्टरमाइंड' का सिंडिकेट
साइबर पुलिस उपायुक्त स्मृतिक राजनाला के अनुसार, ये कॉल सेंटर पिछले एक साल से बिना किसी वैध दस्तावेज के चल रहे थे। जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे गिरोह की डोर अहमदाबाद में बैठे एक मास्टरमाइंड के हाथ में थी। वहीं से कर्मचारियों की सैलरी, कमीशन और हवाला के जरिए पैसों के लेनदेन का पूरा मैनेजमेंट किया जाता था।
कैसे बिछाया जाता था ठगी का जाल?
यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से काम करता था। इनके काम करने के तरीके को इन चरणों में समझा जा सकता है:
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डेटा चोरी: सबसे पहले व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए विदेशी नागरिकों (मुख्यतः लोन चाहने वालों) का डेटा जुटाया जाता था।
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स्क्रिप्टेड कॉलिंग: युवाओं को अंग्रेजी में लिखी हुई स्क्रिप्ट दी जाती थी, जिसे पढ़कर वे विदेशी नागरिकों को लोन दिलाने और CIBIL सुधारने का झांसा देते थे।
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चीन से कनेक्शन और फर्जी चेक: जब ग्राहक तैयार हो जाता, तो टेक्निकल ग्रुप (जो कथित तौर पर चीन से संचालित होता था) बैंक डिटेल्स लेकर एक 'क्लोन चेक' तैयार करता था।
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बैंकिंग सिस्टम का फायदा: ठग जानते थे कि बैंक छोटी रकम के चेक को तुरंत क्रेडिट कर देते हैं और उसकी विस्तृत जांच 48 घंटे बाद होती है। इसी का फायदा उठाकर वे ग्राहक के खाते में पैसे डलवा देते थे।
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गिफ्ट कार्ड का खेल: खाते में पैसे दिखने पर ग्राहक का भरोसा जीत लिया जाता था। फिर उससे कहा जाता कि यह कंपनी का पैसा है, इसे Apple, Google या Amazon गिफ्ट कार्ड के रूप में वापस करें।
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कैश और हवाला: जैसे ही ग्राहक गिफ्ट कार्ड के कोड भेजता, 'रिडीम ग्रुप' उसे कैश में बदलकर हवाला के जरिए मास्टरमाइंड तक पहुंचा देता था।
गिरोह का प्रोफाइल और बरामदगी
हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार किए गए 42 आरोपियों में से कोई भी छत्तीसगढ़ का नहीं है। ये सभी गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मेघालय जैसे राज्यों से आए 10वीं-12वीं पास युवा हैं।
आकर्षक सैलरी का लालच
इन युवाओं को अपराध की दलदल में धकेलने के लिए मोटी सैलरी का लालच दिया जाता था। कॉलर्स को 15,000 से 18,000 रुपये, जबकि सुपरवाइजरों को 40,000 रुपये तक और रहने-खाने की मुफ्त सुविधा दी जाती थी।
आगे की राह
रायपुर पुलिस अब इस मामले के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन खंगाल रही है। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस का मुख्य लक्ष्य अब अहमदाबाद में बैठे मास्टरमाइंड को सलाखों के पीछे पहुंचाना है।
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