पश्चिम बंगाल: आर.एन. रवि ने ली राज्यपाल पद की शपथ, ममता सरकार के साथ नए अध्याय की शुरुआत
आर.एन. रवि ने पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ली। कोलकाता के लोक भवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। जानें क्या रहा राज्यपाल का पहला संबोधन और इस नई नियुक्ति के राजनीतिक मायने।Puja Sahu
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में एक नए राजनीतिक युग की आहट के बीच, रवींद्र नारायण रवि ने राज्य के नए राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। कोलकाता स्थित 'लोक भवन' में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल ने उन्हें शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह निर्धारित समय के अनुसार सुबह 11:30 बजे शुरू हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत और समापन राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' और राष्ट्रगान 'जन गण मन' की गूँज के साथ हुआ।
प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी और 'विपक्ष' की दूरी
समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी और लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन बिमान बोस सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। हालांकि, कार्यक्रम में विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही और इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
"बंगाल भारत की आध्यात्मिक और बौद्धिक राजधानी"
शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में राज्यपाल आर.एन. रवि भावुक और विनम्र नजर आए। उन्होंने बंगाल की विरासत का सम्मान करते हुए कहा:
"मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत महसूस कर रहा हूँ कि मुझे इस महान भूमि की सेवा करने का अवसर मिला है। बंगाल हजारों वर्षों से भारत की आध्यात्मिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक राजधानी रहा है। यह वह भूमि है जहाँ वेदों का ज्ञान फला-फूला और भक्ति की महान परंपरा ने जन्म लिया।"
विवादों का साया और भविष्य की चुनौतियां
आर.एन. रवि का बंगाल आगमन राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जा रहा है। इससे पहले तमिलनाडु के राज्यपाल रहते हुए उनका वहां की एम.के. स्टालिन सरकार (DMK) के साथ कई बार टकराव हुआ था। विभिन्न विधेयकों को रोकने और प्रशासनिक फैसलों को लेकर तमिलनाडु सरकार ने तो राष्ट्रपति से उन्हें हटाने तक की गुहार लगाई थी।
पश्चिम बंगाल में भी पूर्व राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हैरानी जताई थी। अब देखना यह होगा कि आर.एन. रवि और ममता बनर्जी के बीच संबंध कैसे रहते हैं, क्योंकि राज्य में अक्सर राजभवन और सचिवालय (नबन्ना) के बीच खींचतान की खबरें आती रही हैं।
शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री और उपस्थित अतिथियों से शिष्टाचार भेंट की और राज्य के विकास के लिए मिलकर काम करने के संकेत दिए।
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