पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया का सरकार पर तीखा हमला; नक्सलवाद, अफीम और ऑडिट गड़बड़ी पर घेरा
पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया ने नक्सली पापा राव के सरेंडर का श्रेय कांग्रेस सरकार को दिया। अफीम की कार्यवाही और पंचायत ऑडिट में गड़बड़ी को लेकर बीजेपी पर साधा निशाना; कहा- "बीजेपी को अब 'खिलता हुआ अफीम' पर चुनाव लड़ना चाहिए।"Puja Sahu
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज बयानों का दौर गर्म रहा। रायपुर में मीडिया से चर्चा करते हुए पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता शिवकुमार डहरिया ने नक्सली पापा राव के सरेंडर से लेकर प्रदेश में बढ़ती अफीम की खेती और पंचायत ऑडिट में हुई गड़बड़ियों को लेकर साय सरकार पर जमकर निशाना साधा।
नक्सलवाद पर श्रेय की राजनीति
नक्सली कमांडर पापा राव के सरेंडर पर प्रतिक्रिया देते हुए डहरिया ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस हमेशा से छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त देखना चाहती है। उन्होंने वर्तमान सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा:
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पुरानी मेहनत का फल: "हमारी (कांग्रेस) सरकार ने पिछले पांच वर्षों में जो धरातल पर काम किया था, आज उसके परिणाम स्वरूप सरेंडर देखने को मिल रहे हैं।"
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31 मार्च की डेडलाइन: उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए पूछा कि यदि नक्सलवाद खत्म होने का दावा है, तो "31 मार्च के बाद होने वाली घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा?"
"बीजेपी को अब 'खिलता हुआ अफीम' पर चुनाव लड़ना चाहिए"
प्रदेश में हाल ही में सामने आए अफीम के मामलों पर पूर्व मंत्री ने बेहद तंज भरे लहजे में सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में नशे का कारोबार फैल रहा है और सरकार इसे रोकने में नाकाम है।
"बीजेपी अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए केवल लीपापोती कर रही है। हालात ये हैं कि अब बीजेपी को 'कमल' के बजाय 'खिलते हुए अफीम' के निशान पर चुनाव लड़ना चाहिए।"
पंचायत ऑडिट में भ्रष्टाचार का आरोप
पंचायत विभाग के ऑडिट में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं पर तंज कसते हुए डहरिया ने कहा कि बीजेपी की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने मांग की कि इस भ्रष्टाचार में जो भी दोषी हैं, उन पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी सरकार भ्रष्टाचार के दलदल में डूबी हुई है और जनता के पैसों का दुरुपयोग हो रहा है।
पूर्व मंत्री के इन बयानों ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में कांग्रेस, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर साय सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेरने की रणनीति बना चुकी है।
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