होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा कूटनीतिक झटका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने युद्धपोत भेजने से किया इनकार
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है, जिससे अमेरिका इस क्षेत्रीय युद्ध में अलग-थलग पड़ता दिख रहा है।Puja Sahu
वॉशिंगटन/टोक्यो: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के 17वें दिन स्थिति और भी गंभीर हो गई है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’**** को बंद किए जाने के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस मार्ग को फिर से खुलवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मित्र देशों से सैन्य मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें यहाँ एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है।
मित्र देशों ने मोड़ा मुंह
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से अपील की थी कि वे इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक जहाज तैनात करें। ट्रंप ने रविवार को NATO देशों को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि सहयोगी देश मदद नहीं करते हैं, तो गठबंधन का भविष्य संकट में पड़ सकता है।
ट्रंप का तर्क है कि चूंकि इन देशों का अधिकांश तेल और व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया, "दुनिया के बाकी देश अपने जहाजों की सुरक्षा खुद क्यों नहीं करते? हम सालों से उनकी मुफ्त रक्षा कर रहे हैं।"
जापान और ऑस्ट्रेलिया का दो टूक जवाब
ट्रंप की इस अपील को उनके सबसे भरोसेमंद साथियों ने ही ठुकरा दिया है:
- जापान: जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज में युद्धपोत भेजने का उनका कोई इरादा नहीं है। जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 90% क्रूड ऑयल इसी मार्ग से लाता है, लेकिन वह ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहता है।
- ऑस्ट्रेलिया: प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के वफादार साथी ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने साफ किया कि वे इस अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगे।
- दक्षिण कोरिया: सियोल ने कहा कि वे इस अनुरोध की समीक्षा करेंगे, लेकिन फिलहाल युद्धपोत भेजने की कोई योजना नहीं है।
यूरोप भी हुआ अलग-थलग
ब्रिटेन और फ्रांस जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों ने भी इस अमेरिकी गठबंधन में शामिल होने से परहेज किया है। इन देशों का मानना है कि अमेरिका की ईरान नीति के कारण वे किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आग में नहीं कूदना चाहते।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मार्ग?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इसे बंद करने से दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।
फिलहाल, ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' की रणनीति उन पर ही भारी पड़ती दिख रही है, क्योंकि संकट की इस घड़ी में उनके प्रमुख सहयोगी देश सैन्य मोर्चे पर साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं।
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