सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सेना की महिला अधिकारियों को मिलेगी पूरी पेंशन, भेदभाव पर शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: थल सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला SSC अधिकारियों को अब मिलेगी पूरी पेंशन। कोर्ट ने सिस्टम के भेदभाव को स्वीकारते हुए 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन लाभ देने का ऐतिहासिक आदेश दिया है।Puja Sahu
नई दिल्ली : भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने आज एक और मील का पत्थर स्थापित किया है। शीर्ष न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कहा है कि थल सेना, नौसेना और वायु सेना की वे सभी महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी, जिन्हें स्थायी कमीशन से वंचित रखा गया था, अब पूरी पेंशन पाने की हकदार होंगी।
व्यवस्थागत भेदभाव का अंत
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन न मिलना उनकी योग्यता की कमी नहीं थी, बल्कि यह "व्यवस्था में मौजूद भेदभाव" का परिणाम था।
अदालत ने इन महिला अधिकारियों की गरिमा को बहाल करते हुए निर्देश दिया कि:
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जिन महिलाओं के नाम पर 2019, 2020 और 2021 के सेलेक्शन बोर्ड में विचार किया गया था, उन्हें पेंशन के लाभ दिए जाएं।
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भले ही उनकी वास्तविक सेवा अवधि कम रही हो, लेकिन अब कानूनी रूप से यह माना जाएगा कि उन्होंने पेंशन के लिए अनिवार्य 20 साल की सेवा पूरी कर ली है।
"250 की सीमा" पर कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस नीति पर भी सवाल उठाए जिसमें प्रति वर्ष केवल 250 महिलाओं को स्थायी कमीशन देने की सीमा तय की गई थी। कोर्ट ने कहा:
"भविष्य में चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। स्थायी कमीशन का निर्णय योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी मनमानी संख्यात्मक सीमा के आधार पर। विशेष परिस्थितियों में इस 250 की सीमा को पार किया जाना चाहिए।"
पृष्ठभूमि: एक लंबी कानूनी लड़ाई
यह फैसला सुचेता एडन और अन्य महिला अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर आया है। इन याचिकाओं में केंद्र की 2019 की नीति और आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के पुराने फैसलों को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने 2019 से 2021 के बीच बोर्ड द्वारा चुनी गई महिला अधिकारियों की नियुक्तियों को बरकरार रखा है और जो पूर्वाग्रह के कारण रह गई थीं, उन्हें वित्तीय सुरक्षा (पेंशन) सुनिश्चित की है।
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