ट्रंप की 'टारगेटेड' युद्ध नीति से दुनिया में हड़कंप: वेनेजुएला और ईरान के बाद अब क्या अगला नंबर उत्तर कोरिया का?
वेनेजुएला और ईरान के बाद अब क्या राष्ट्रपति ट्रंप का अगला निशाना उत्तर कोरिया है? जानें 9 मार्च 2026 से शुरू हो रहे 'फ्रीडम शील्ड' युद्धाभ्यास, अमेरिका की नई 'सिर काटने' वाली युद्ध नीति और किम जोंग उन की बढ़ती चिंताओं की पूरी इनसाइड स्टोरी।Puja Sahu
वॉशिंगटन/सियोल : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत ने वैश्विक राजनीति और सैन्य समीकरणों को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। साल 2026 के शुरुआती दो महीनों के भीतर दो बड़े सैन्य अभियानों को अंजाम देकर ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी नई 'युद्ध नीति' का मुख्य केंद्र दुश्मन देशों के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना है।
वेनेजुएला और ईरान में तख्तापलट और हमले
साल की शुरुआत में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर अचानक हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। इस सैन्य हस्तक्षेप के बाद से वेनेजुएला की सत्ता में अमेरिका का सीधा प्रभाव बना हुआ है। इसके ठीक बाद, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई। इन घटनाओं ने पूरी दुनिया में खौफ और उथल-पुथल का माहौल पैदा कर दिया है।
फ्रीडम शील्ड: उत्तर कोरिया की सीमा पर सैन्य हलचल
अब ट्रंप के निशाने पर उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन माने जा रहे हैं। आज यानी 9 मार्च से अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपना विशाल सैन्य अभ्यास ‘फ्रीडम शील्ड’ शुरू कर दिया है।
-
अवधि: 9 मार्च से 19 मार्च 2026 तक।
-
सैनिकों की संख्या: लगभग 18,000 दक्षिण कोरियाई और हजारों अमेरिकी सैनिक।
-
उद्देश्य: संयुक्त परिचालन क्षमताओं का परीक्षण और बदलते युद्ध परिदृश्यों के लिए तैयारी।
हथियारों के ट्रांसफर पर गहराता रहस्य
इस युद्धाभ्यास के बीच दक्षिण कोरियाई मीडिया में यह अटकलें तेज हैं कि वाशिंगटन अपने कुछ महत्वपूर्ण सैन्य संसाधनों, जैसे पैट्रियट एंटी-मिसाइल सिस्टम, को दक्षिण कोरिया से हटाकर ईरान के खिलाफ चल रहे मोर्चे पर भेज रहा है। हालांकि अमेरिकी सेना ने सुरक्षा कारणों से इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, लेकिन दक्षिण कोरियाई अधिकारियों का कहना है कि इससे उनकी संयुक्त रक्षा रणनीति कमजोर नहीं होगी।
उत्तर कोरिया की आपत्ति और रूस से बढ़ती नजदीकी
उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने इस अभ्यास को 'आक्रमण का पूर्वाभ्यास' करार दिया है। 2019 में ट्रंप के साथ शिखर सम्मेलन विफल होने के बाद से प्योंगयांग ने अमेरिका से बातचीत बंद कर दी है। मौजूदा स्थिति: किम जोंग उन ने यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद के लिए हथियार और सैनिक भेजे हैं, जिसके बदले में उन्हें परमाणु शस्त्रागार विकसित करने में रूसी तकनीक और समर्थन मिल रहा है।
अमेरिका की नई 'सिर काटने' वाली युद्ध नीति (Decapitation Strike)
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अब ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ यानी दुश्मन के नेतृत्व को खत्म करने की नीति पर काम कर रहा है। वाशिंगटन पोस्ट के डेविड इग्नेशियस के अनुसार, दुश्मन नेताओं की 'टारगेटेड हत्या' अब अमेरिकी युद्ध का 'न्यू नॉर्मल' बन गया है। लीगल फ्रेमवर्क में बदलाव के कारण अमेरिका अब इन हत्याओं को कानूनी रूप से सही ठहराता है, जो किसी भी देश की संप्रभुता के लिए बड़ी चुनौती है।
इस लेख को शेयर करें
टिप्पणियां (0)
टिप्पणी करने के लिए लॉग इन करें
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है
पहले टिप्पणी करने वाले बनें!
