मुस्लिम लॉ नहीं, देश के कानून से चलना चाहिए भारत": वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सलीम राज ने किया UCC का समर्थन
"मुस्लिम लॉ नहीं, संविधान से चलेगा देश": वक्फ बोर्ड चीफ डॉ. सलीम राज ने समान नागरिक संहिता (UCC) पर दिया बड़ा बयान। उन्होंने जाति-धर्म से ऊपर 'एक देश, एक कानून' की पुरजोर वकालत की।Puja Sahu
नई दिल्ली : देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही बहस के बीच वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज का एक बेहद महत्वपूर्ण और साहसिक बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में 'एक देश, एक संविधान और एक कानून' की वकालत करते हुए कहा कि भारत किसी धर्म विशेष के रीति-रिवाजों से नहीं, बल्कि देश के कानून से चलना चाहिए।
'दोहरा मापदंड' खत्म करने की मांग
डॉ. सलीम राज ने मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान में देश में एक तरह का दोहरा मापदंड चल रहा है। उन्होंने तर्क दिया: सनातनियों को एक कानून: हिंदू समाज के लोग देश के सामान्य कानून का पालन करते हैं।
- मुस्लिमों को दो कानून: मुस्लिम समाज को सामान्य कानून के साथ-साथ मुस्लिम पर्सनल लॉ का भी लाभ मिलता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह का भेदभाव खत्म होना चाहिए और सभी धर्मों के साथ समान रूप से न्याय होना चाहिए।
धर्म व्यक्तिगत, कानून सार्वभौमिक
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने विविधता और कानून के बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए कहा, "जाति और धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कानून एक ही होना चाहिए।" उन्होंने साफ किया कि देश मुस्लिम या ईसाई रीति-रिवाजों के आधार पर नहीं चल सकता। उनके अनुसार, मजहब व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों के लिए पूरे राष्ट्र में एक ही संहिता लागू होनी चाहिए।
कानून के शासन पर जोर
सलीम राज ने अपने बयान के अंत में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि देश को 'मुस्लिम लॉ' के हिसाब से चलाने की जिद छोड़नी होगी। उनके मुताबिक, राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए यह जरूरी है कि हर नागरिक, चाहे वह किसी भी मजहब का हो, भारतीय संविधान द्वारा निर्धारित एक समान कानून के दायरे में आए।
इस लेख को शेयर करें
टिप्पणियां (0)
टिप्पणी करने के लिए लॉग इन करें
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है
पहले टिप्पणी करने वाले बनें!
