यमुना की बाढ़ से दिल्ली को बचाने के लिए 'जापानी तकनीक' की तैयारी: अब अंडरग्राउंड रिजर्वायर में मुड़ेगा पानी
2023 की भयंकर बाढ़ से सबक लेते हुए दिल्ली सरकार अब यमुना को सुरक्षित करने के लिए जापान का 'टोक्यो मॉडल' अपनाने पर विचार कर रही है। जानें कैसे अंडरग्राउंड रिजर्वायर और टनल सिस्टम से राजधानी को बाढ़ मुक्त बनाने की तैयारी है।Puja Sahu
नई दिल्ली : साल 2023 में यमुना नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से सबक लेते हुए दिल्ली सरकार अब राजधानी को सुरक्षित करने के लिए विश्वस्तरीय मॉडलों पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली प्रशासन अब जापान की उस प्रसिद्ध तकनीक को अपनाने की योजना बना रहा है, जिसने टोक्यो को बाढ़ मुक्त बनाने में सफलता हासिल की थी।
क्या है जापानी मॉडल?
जापान ने करीब 20 साल पहले टोक्यो और उसके आसपास की नदियों के उफान से निपटने के लिए एक विशाल अंडरग्राउंड टनल सिस्टम और रिजर्वायर (जलाशय) का निर्माण किया था।
- कार्यप्रणाली: इस तकनीक के तहत, जब नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाता है, तो अतिरिक्त पानी को लंबी सुरंगों के माध्यम से जमीन के नीचे बने विशाल टैंकों में मोड़ दिया जाता है।
- फायदा: इससे न केवल रिहायशी इलाकों और खेती को डूबने से बचाया जाता है, बल्कि जमा किए गए पानी का उपयोग बाद में अन्य कार्यों के लिए भी किया जा सकता है।
2023 की बाढ़ का सबक और नई कमिटी के सुझाव
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2023 की बारिश 1978 की तुलना में 23.8% अधिक थी। यमुना में पानी का प्रवाह 6999 क्यूमेक तक पहुंच गया था, जबकि 1978 में बने मौजूदा बांध केवल 6700 क्यूमेक तक की क्षमता झेल सकते हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए जल शक्ति मंत्रालय ने एक 'जॉइंट फ्लड मैनेजमेंट कमिटी' का गठन किया है। इस कमिटी ने दिल्ली को डूबने से बचाने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- बांधों की ऊंचाई बढ़ाना: मौजूदा तटबंधों को और ऊँचा किया जाए ताकि पानी ऊपर से न बहे।
- ऊपरी प्रवाह में नए बांध: यमुना के ऊपरी क्षेत्रों में रेणुकानी, किशाऊ, लखवार-व्यासी और हथनीकुंड जैसे स्थानों पर नए बांधों का निर्माण।
- जापानी मॉडल का अध्ययन: दिल्ली की भौगोलिक स्थिति के अनुसार अंडरग्राउंड रिजर्वायर की संभावना तलाशना।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
विशेषज्ञों का कहना है कि 1978 के बाद बनाए गए पूर्वी और पश्चिमी तटबंध अब आज की चरम जलवायु परिस्थितियों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। 2023 में बाढ़ का पानी आईटीओ जैसे मुख्य क्षेत्रों तक पहुँच गया था, जिसने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।
"हम टोक्यो मॉडल का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं। यदि हम पानी को शहर के बाहर या जमीन के नीचे सुरक्षित रूप से डायवर्ट कर पाए, तो भविष्य में यमुना के बढ़ते जलस्तर से कोई खतरा नहीं होगा।" — संबंधित विभाग के अधिकारी
भविष्य की योजना
फिलहाल इस मॉडल पर तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी अध्ययन जारी है। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है, तो दिल्ली न केवल बाढ़ से सुरक्षित होगी, बल्कि जल संचयन के मामले में भी एक मिसाल पेश करेगी।
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